कोलकाता: भारतीय नौसेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि पूर्वी एवं पश्चिमी समुद्री सीमा क्षेत्र में हजारों किलोमीटर लंबी तटरेखा में फैले समुद्री मार्गों और बंदरगाहों की हिफाजत के लिए नौसेना के पास अभी सिर्फ दो ‘माइनस्वीपर’ हैं. ‘माइनस्वीपर’ ऐसे जहाज को कहते हैं जो पानी के भीतर बनाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करते हैं. नौसेना में सहायक सामग्री प्रमुख रियर एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन ने बताया कि नौसेना को बारूदी सुरंग हटाने वाले 12 जहाजों की जरूरत है, लेकिन अभी उसके पास सिर्फ दो ऐसे जहाज हैं. चीन के पास इस तरह के 100 जहाज है. Also Read - Sarkari Results 2020: Indian Navy SSR and AA Recruitment: भारतीय नौसेना ने SSR और AA का रिजल्ट किया जारी, ऐसे करें चेक

स्वामीनाथन ने कहा, ‘नौसेना को इन जहाजों की तुरंत जरूरत है.’ शुक्रवार को नौसेना के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ‘माइनस्वीपरों’ के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से गठजोड़ की प्रक्रिया में है. सरकार 32,000 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के लिए एक विदेशी कंपनी की तलाश में है ताकि 12 माइनस्वीपर जहाजों की खरीद की जा सके. इन जहाजों का बुनियादी काम पानी के भीतर बनाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाना, उसे श्रेणीबद्ध करना और नष्ट करना है. Also Read - डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी सेना पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया था P-8I टोही विमान

गौरतलब है कि दो माइनस्वीपर जहाज मई में रिटायर हुए थे. आपको बता दें कि मई में रिटायर होने वाले कारवाड़ और काकीनाडा नाम के दो माइनस्वीपर जहाजों को सोवियत संघ के जमाने में खरीदा गया था. दोनों को 1986 में नौसेना में शामिल किया गया था. पिछले 30 सालों के दौरान कई मिशनों में इनसे सफलतापूर्वक काम लिया गया. सेना के लिए इस तरह के जहाजों की कमी पर एक संसदीय रिपोर्ट में भी चिंता जताई गई थी. इस मामले में सरकार से गंभीर कदम उठाने का आग्रह किया गया था. Also Read - Gangasagar Mela: बचाव, राहत कार्यों के लिए तैनात किए गए भारतीय नौसेना के विशेष डाइविंग टीम