Nda Rule Ncrb Report Crime Rate Dropped Women Safer Than Upa Era In India
2014 के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हुए या बढ़े? NCRB ने जारी किए ताजा आंकड़े...यहां देखें पूरी डिटेल
NCRB Report India: भारत में महिलाओं की सुरक्षा और हिंसक अपराधों की स्थिति हमेशा से एक गंभीर चिंता का विषय रही है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि जहां 2004 से 2014 के बीच अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई.
NCRB Report : भारत में महिलाओं की सुरक्षा और हिंसक अपराधों की स्थिति हमेशा से एक गंभीर चिंता का विषय रही है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि जहां 2004 से 2014 के बीच अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं 2014 के बाद से इन मामलों में कमी आई है. खासकर हत्या, दहेज हत्या, दंगे और रेप जैसे गंभीर अपराधों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश का माहौल पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है.
UPA Vs NDA शासनकाल महिलाओं के खिलाफ अपराध
UPA शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा था. उदाहरण के तौर पर, 2004 में जहां 18,233 रेप केस दर्ज हुए थे, वहीं 2014 तक यह संख्या लगभग दोगुनी होकर 36,735 हो गई. दहेज हत्या और हत्या के मामलों में भी यही स्थिति रही. इसके विपरीत, NDA शासनकाल में इन मामलों में गिरावट दर्ज हुई. 2023 तक रेप के मामले घटकर 29,670 रह गए, जो 2014 की तुलना में लगभग 19% की कमी दर्शाता है. यह बदलाव इस बात का संकेत है कि कठोर कानून और सख्त कार्रवाई महिलाओं की सुरक्षा के लिए असरदार साबित हुए हैं.
दहेज हत्या और दंगों के मामले
दहेज हत्या और दंगों के मामलों पर नजर डालें तो तस्वीर और भी स्पष्ट होती है. 2004 से 2014 के बीच दहेज हत्या के मामलों में करीब 20% की बढ़ोतरी दर्ज हुई और 2014 में ऐसे मामलों की संख्या 8,455 तक पहुंच गई. लेकिन 2014 के बाद इनमें लगातार कमी आई और 2023 में यह संख्या घटकर 6,156 रह गई. इसी तरह, UPA काल में दंगों की घटनाएं बढ़कर 66,042 तक पहुंच गई थीं, जबकि 2023 तक यह घटकर 39,260 रह गईं. यानी लगभग 40% की गिरावट, जो दर्शाती है कि NDA काल में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास हुए.
2014 के बाद दर्ज की गई है कमी
हत्याओं के मामलों में भी यही पैटर्न देखा गया. UPA शासनकाल में हत्याओं की संख्या लगभग स्थिर रही और औसतन 33,000 से ज्यादा मामले हर साल दर्ज होते रहे. लेकिन 2014 के बाद इन मामलों में गिरावट आई और 2023 तक यह घटकर 27,721 रह गए. इसका मतलब है कि हिंसक अपराधों के इस सबसे गंभीर रूप में भी लगभग 18% की कमी दर्ज की गई. समग्र रूप से देखें तो 2004 से 2014 के बीच हिंसक अपराधों में 22% की वृद्धि हुई थी, जबकि 2023 तक इन मामलों में 29% की कमी आई, जो इसे 2004 के स्तर से भी नीचे ले गई.
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