नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किये जाने और इसके प्रति लोगों में विश्वास जगाने की जरुरत है, जो फिलहाल ‘‘वेंटिलेटर’’ पर है. अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर की आर्थिक स्थिति पर आयोजित एक संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने यह बात कही. सैर सपाटा उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सेमिनार ‘‘कश्मीरोनॉमिक्स” में एकत्र हुए थे. सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि यह समय अतीत को भुलाने और बेहतर कल की ओर देखने का है.

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द कर दिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया. कश्मीर घाटी में एक होटल मालिक आसिफ इकबाल बुर्जा ने कहा कि पर्यटन लोगों को लोगों से जोड़ता है और लोगों को सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर एकजुट करता है.

सैर सपाटा कंपनी एबिक्स समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवीन कुंडू ने कहा कि उन्हें लगता है कि निजी निवेशकों के लिए कदम बढ़ाने का समय आ गया है. कुंडू ने कहा, ‘‘कश्मीर के गौरव को बहाल करने के लिए हमें पुराने दर्द को भुलाना होगा और हर कश्मीरी को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी.’’ आर्थिक मामलों के विभाग के पूर्व सचिव आर गोपालन ने कहा कि नए प्रशासन के पास नवनिर्मित केंद्र शासित प्रदेश में बुनियादी ढांचा तैयार करने और लोगों को घाटी तक लाने के लिए उचित विपणन रणनीति सुनिश्चित करने का कठिन काम है.

(इनपुट भाषा)