'89 पेपर लीक, 48 री-एग्जाम...', NEET विवाद पर राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला, बोले- अब परीक्षा नहीं 'नीलामी' हो रही है
NEET 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि छात्रों की मेहनत के साथ खिलवाड़ हो रहा है. वहीं, NTA ने दावा किया कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई थी.
Rahul Gandhi on NEET Exam: NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक विवाद ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा अब 'नीलामी' में बदलती जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है और सरकार एग्जाम प्रणाली की विश्वसनीयता बचाने में नाकाम रही है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि पिछले 10 सालों में 89 पेपर लीक और 48 री-एग्जाम हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ लोग पैसों के दम पर सवाल खरीद लेते हैं और पूरी मेहनत बेकार हो जाती है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि NEET 2026 के सवाल एग्जाम से कई घंटे पहले व्हाट्सएप ग्रुप्स में घूम रहे थे. राहुल गांधी ने कहा कि ये केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भरोसे का सवाल है. उन्होंने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि छात्रों का विश्वास टूट रहा है.
इधर, इस पूरे मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जांच कर रही है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, एक कथित 'गेस पेपर' सामने आया है जिसमें करीब 410 सवाल थे. दावा किया जा रहा है कि इनमें से लगभग 120 सवाल असली NEET परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन से मेल खाते हैं. पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि यह पेपर कहां से आया और किन लोगों तक पहुंचा.
राजस्थान SOG के अधिकारियों का दावा
राजस्थान SOG के अधिकारियों ने बताया कि ये दस्तावेज परीक्षा से करीब एक महीने पहले कुछ लोगों के बीच घूम रहा था. अब पुलिस तकनीकी जांच और डिजिटल सबूतों के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है. कई लोगों से पूछताछ भी की जा रही है. दूसरी तरफ, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सभी आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि NEET 2026 परीक्षा 'फुल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल' के तहत आयोजित की गई थी.
एजेंसी ने बताया कि क्वेश्चन पेपर GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों से भेजे गए थे और परीक्षा केंद्रों पर AI आधारित CCTV निगरानी रखी गई थी. इसके अलावा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और 5G जैमर जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया. NTA का कहना है कि परीक्षा के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी उन्हें बाद में मिली, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों को सूचना दी गई. एजेंसी ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, इस विवाद ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर भी लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. छात्रों का कहना है कि अगर पेपर लीक जैसी घटनाएं बार-बार होती रहीं तो मेहनत और ईमानदारी का कोई मतलब नहीं बचेगा. अब सबकी नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश की सबसे अहम परीक्षाओं में से एक की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है.
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