श्रीनगर: भाजपा महासचिव राम माधव ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘एनआरसी’ से ना तो संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का और ना ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का कोई संबंध है. साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत सरकार की छवि धूमिल करने के लिए दुष्प्रचार कर रहा है.

सीएए के मुस्लिम विरोधी होने की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए माधव ने कहा कि अतीत में भी भारत ने अपने मूल देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर पलायन करके आए लोगों को नागरिकता प्रदान की है. मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एनपीआर को अद्यतन करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की. इस डेटाबेस में देश के प्रत्येक बाशिंदे का जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक विवरण होगा. कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि एनपीआर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की दिशा में पहला कदम है.

माधव ने यहां संवाददताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सीएए या एनपीआर का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है. यह चर्चा करना अभी जल्दबाजी होगी कि एनआरसी आने पर क्या होगा… अभी तक, एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई है. सीएए और एनआरसी के बीच अतीत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संबंध बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दो दिन पहले ही इस पर स्थिति स्पष्ट की है. माधव ने कहा कि विपक्षी दल केंद्र की भाजपा नीत सरकार की छवि धूमिल करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उनके पास उठाने के लिए कोई मुद्दा नहीं है.

उन्होंने कहा कि एनपीआर एक नियमित कार्य है जिसे सबसे पहले 2010 में संप्रग सरकार ने शुरू किया था. लेकिन इसकी 2015 में समीक्षा की गई क्योंकि पहले की कवायद व्यापक नहीं थी. एनपीआर जनगणना का विस्तार है जो आगे 2021 में होगी. माधव ने कहा कि सरकार को इसके आंकड़े अद्यतन करने की जरूरत है ताकि उसकी नीतियों के फायदे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचें. उन्होंने सीएए के बारे में कहा कि जब (भारतीय मूल के) लोगों ने इदी अमीन के शासन के दौरान यूगांडा से पलायन करना शुरू किया था, तब हमने उन्हें नागरिकता दी थी. सीएए इसी तरह का एक प्रावधान है.

उन्होंने कहा कि हम तो इच्छुक लोगों को भी नागरिकता दे रहे हैं, बशर्ते कि वे जरूरी मानदंडों को पूरा करते हों. अदनान सामी को नागरिकता दी गई. माधव ने उत्तर प्रदेश में सीएए प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग करने के आरोपों को भी खारिज कर दिया. माधव ने कहा कि उन्होंने (पुलिस ने) अपने पास मौजूद अधिकारों के मुताबिक कार्रवाई की…हिंसक प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए. उन्होंने कहा कि बाकी सब दुष्प्रचार है. इस महीने की शुरूआत में सीएए के संसद से पारित होने के बाद इसके खिलाफ पूर्वोत्तर से शुरू हुआ प्रदर्शन देश भर में फैल गया. अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 19 लोग मारे गए हैं.