नई दिल्ली. केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को मंगलवार को राज्यसभा में सदन का नेता नियुक्त किया गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली सरकार में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली इस पद पर थे. फिलहाल जेटली बीमार चल रहे हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. राज्यसभा में सदन के नेता की नियुक्ति केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी करती है.Also Read - सुवेंदु अधिकारी बोले- बाबुल सुप्रियो को संसद से तुरंत इस्‍तीफा देना चाहिए, TMC भेज सकती है राज्‍यसभा

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गहलोत अनुभवी सांसद और भाजपा के वरिष्ठ दलित नेता हैं. 2014 में पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में भी गहलोत को सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय की जिम्मेदारी ही मिली थी. मध्यप्रदेश से आने वाले गहलोत के पास चार दशक लंबा संसदीय अनुभव है. वह मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे हैं. आपको बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद मंत्रिमंडल से खुद को अलग रखने की घोषणा कर दी थी. जेटली ने इस बाबत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी को पत्र भी लिखा था. वहीं, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सेहत संबंधी वजहों से लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. Also Read - राज्यसभा भेजे जाएंगे बाबुल सुप्रियो? अर्पिता घोष की जगह टिकट दे सकती है तृणमूल कांग्रेस

दो अफसरों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा Also Read - Rajya Sabha by-Polls: BJP ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एल मुरुगन को इन राज्‍यों से उम्मीदवार किया घोषित

इस बीच नृपेंद्र मिश्रा और पी. के. मिश्रा को मंगलवार को फिर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्रमश: प्रधान सचिव और अतिरिक्त प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है. दोनों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है. कार्मिक मंत्रालय के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 31 मई के प्रभाव से दोनों की नियुक्तियों को मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि दोनों का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ पूरा होगा.

(इनपुट – एजेंसी)