नई दिल्ली: सीबीआई ने एक फर्जी ‘बोर्ड’ के संबंध में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं जो कि कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र मुहैया कराता था और जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश के स्कूलों में कुछ सहायक शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर एजेंसी की ओर से की गई एक प्रारंभिक जांच के बाद हुई है. जांच में यह बात सामने आयी कि दो गिरोह (एक गाजियाबाद में और दूसरा कासगंज में) छात्रों को ‘बोर्ड ऑफ सेकंड एजुकेशन मध्य भारत, ग्वालियर’ के नाम पर प्रदान किए जा रहे थे.’ Also Read - रिया चक्रवर्ती की शिकायत पर सुशांत की बहनों पर FIR, सीबीआई ने मुंबई पुलिस को फटकारा

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एजेंसी ने कासगंज से गिरोह चला रहे गंगा दयाल शाक्य और गाजियाबाद से गिरोह चला रहे महेश चंद्रवंशी के खिलाफ मामला दर्ज किया. दोनों ने बोर्ड का अध्यक्ष होने का दावा किया था. अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने उनके सहयोगियों और अन्य के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है जिन्होंने उत्तर प्रदेश के स्कूल में नौकरी के लिए आवेदन के लिए प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया. सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि एजेंसी को पता चला कि बोर्ड आफ सेकंड एजुकेशन मध्य भारत, ग्वालियर किसी सरकारी एजेंसी द्वारा स्वीकृत नहीं है. Also Read - हाथरस कांड पर SC का फैसला-अभी केस ट्रायल यूपी में ही होगा, तुरंत ट्रांसफर की जरूरत नहीं

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इसमें कहा है कि इस बोर्ड द्वारा कराई जा रही परीक्षा कानून के तहत स्थापित अन्य बोर्ड के बराबर नहीं है. यह भी पाया गया कि काउंसिल आफ बोर्ड्स आफ स्कूल एजुकेशन, दिल्ली का सदस्य नहीं है. देश में किसी भी शैक्षिक बोर्ड को संचालित करने और कोई भी परीक्षा कराने के लिए सीओडीएसई की सदस्यता जरूरी है. यह पाया गया कि 10 उम्मीदवारों ने उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक शिक्षक की नौकरियों पाने का प्रयास किया जिनमें से पांच ने वह हासिल भी कर ली. सीबीआई ने कहा कि दो उम्मीदवारों को उनके अंकपत्र चंद्रवंशी से जबकि बाकी आठ को वह शाक्य से मिले थे.