नई दिल्ली: दूरसंचार क्षेत्र में नुकसान का दौर अभी तीन तिमाहियों तक और चल सकता है. इस क्षेत्र की कंपनियों के संगठन सेल्युलर आपरेटर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सीओएआई) का कहना है कि यह क्षेत्र पर ऊंचे शुल्कों के बोझ और सेवाओं की दरों के अव्यावहारिक रूप से नीचे होने से प्रभावित है. सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने पीटीआई भाषा से कहा कि मौजूदा परिदृश्य में मुझे लगता है कि तीन और तिमाहियां नुकसान वाली रहेंगी. व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि मौजूदा शुल्क उद्योग की दीर्घावधि की सेहन की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है.’ Also Read - बड़ी राहत: 7 माह बाद हबीबगंज- नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस 17 अक्टूबर से फिर से चलेगी

मैथ्यूज ने कहा कि लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क काफी ऊंचे हैं. साथ ही आपरेटरों को स्पेक्ट्रम के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ा है जिससे उनकी परेशानी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि 2018-19 निश्चित रूप से वित्तीय प्रदर्शन की दृष्टि से उद्योग के लिए एक कठिन साल होगा. उन्होंने कहा कि ‘इस वित्त वर्ष में हम पहले ही दो तिमाहियों में नुकसान उठा चुके हैं. ऐसे में अगली दो तिमाहियों में कुछ चमत्कार हो तो स्थिति सुधर सकती है. हम जानते हैं कि ऐसा नहीं होने वाला. निश्चित रूप से चालू वित्त वर्ष वित्तीय प्रदर्शन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन 2019-20 में हम स्थिति कुछ स्पष्ट होते देखेंगे. Also Read - दिल्ली में तीन महीने बाद बहाल होंगी AIIMS की OPD सेवाएं, पहले इन रोगियों का होगा इलाज

वर्ष 2016 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो की शुरुआत की थी. चौथी पीढ़ी की इस वायरलेस ने दूरसंचार उद्योग की स्थिति बिगाड़ दी थी, क्योंकि जियो ने मुफ्त वॉयस कॉल के साथ काफी सस्ता डेटा उपलब्ध कराया. जियो की सस्ती दरों की वजह से एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया (अब वोडाफोन आइडिया लि.) को भी शुल्कों में भारी कटौती करनी पड़ी है. यह पूछे जाने पर कि क्या मोबाइल दरों में और गिरावट आएगी या यह स्थिर रहेंगी, मैथ्यूज ने कहा कि दरें पहले से ही काफी उचित स्तर पर हैं. Also Read - दिल्ली से अमृतसर का सफर मात्र 4 घंटे में होगा पूरा, सिखों के इन प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा सड़क मार्ग