नई दिल्ली: देश में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने और गैर मुस्लिमों को अपनी तहजीब से रू-ब-रू कराने के इरादे से लेखिका नाजिया इरम द्वारा शुरू की गई ‘इंटर फेथ’ इफ्तार की अनोखी पहल परवान चढ़ने लगी है. इस बार कई पेशेवर मुस्लिम महिलाएं भी इसका हिस्सा बन गई हैं, जो माह-ए-रमजान में अपने-अपने घरों में इंटर फेथ इफ्तार कर तमाम गैर मुस्लिम दोस्तों, रिश्तेदारों और जानने वालों को आमंत्रित कर रही हैं. Also Read - पीएम मोदी ने दी रमज़ान की मुबारकबाद, कहा- ये माह दया और सौहार्द लेकर आए, कोरोना से जीत मिले

पिछले साल की थी शुरुआत
नाजिया ने पिछले साल एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी इस अनोखी मुहिम की शुरूआत की थी. इसके बाद अलग-अलग पेशे की महिलाएं इससे जुड़ी. इस पहल में उनके अलावा अलावा पत्रकार सादिया अलीम, इतिहासकार राना सफवी, पायलट हाना मोहसीन खान, पत्रकार मारया फातिमा, दास्तानगो मीरा रिजवी, ब्लॉगर रूखसार सलीम, सुबल खान, साराह रहमान और बाइकर फिरदौस शेख शामिल हुईं और अपने अपने घरों में इफ्तार दावत का आयोजन कर अपने गैर मुस्लिम दोस्तों और जानने वालों को आमंत्रित किया. Also Read - लॉकडाउन के दौरान न हो कोई परेशानी, लोगों में 50 हजार रमजान फूड किट भेजेगा श्रीनगर जिला प्रशासन

इफ्तार में मुस्लिम महिलाओं के हिंदू दोस्त आमंत्रित किए जाते हैं. फोटो फेसबुक

इफ्तार में मुस्लिम महिलाओं के हिंदू दोस्त आमंत्रित किए जाते हैं. (फोटो सोशल मीडिया से)

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इंटरफेथ इफ्तार में शामिल कर रहे हिंदू दोस्त
इन महिलाओं का मानना है कि इंटरफेथ इफ्तार से दोनों समुदायों के बीच की दूरियां और गलतफहमियां कम होंगी और दोनों एक दूसरे की संस्कृति से रू-ब-रू होंगे. नाजिया ने कहा, ‘हम सबके गैर मुस्लिम दोस्त होते हैं, लेकिन वह इफ्तार के लिए कभी हमारे घरों में नहीं आते हैं, क्योंकि मुसलमानों के बारे में काफी गलत धारणाएं फैली हुई हैं और वे हमारी तहजीब से परिचित नहीं होते हैं. इस तरह के इफ्तार का आयोजन करके हम उनकी गलतफहमियों को दूर कर सकते हैं.’

बच्चों को बेहतर बातें सिखाएंगे ताकि समाज बेहतर बने
महिलाओं का कहना है कि ‘हम बच्चों को प्यार और भाइचारे से सबके साथ मिल जुलकर रहना सिखाएंगे तो कल वह एक बेहतर समाज का निर्माण करेंगे.’ पेशे से मीडियाकर्मी और हैपीनेंस ट्रस्ट की संचालक सादिया अलीम ने कहा कि ‘रमजान में मुसलमान रोजा रखते हैं. वह अल्लाह से जुड़कर अपने अंदर की बुराई को खत्म करके बेहतर इंसान बनने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि रमजान का महीना मोहब्बत का पैगाम देता है. इस संदेश को फैलाने की जरूरत है. इंटरफेथ इफ्तार के आयोजन का मकसद ही यह है कि गैर मुस्लिम रमजान और मुस्लिम तहजीब को जान सकें.’

फोटो फेसबुक

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आनंदिता बोलीं- एक दस्तरखां पर बैठकर दिलों की दूरियां कम कर सकते हैं
पहली बार किसी मुस्लिम के घर इफ्तार में आई गृहिणी आनंदिता ने कहा कि ‘हमारे देश में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. जब तक हमारे दिलों और घरों में लकीरें खिंची रहेंगी तब तक नफरत बनी रहेगी. हम एक दस्तरखां पर बैठकर अपने दिलों की दूरियों को दूर कर सकते हैं.’ निजी कंपनी में काम करने वाले दिनेश लाल ने कहा कि अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ बैठकर इफ्तार करके आप उनके बारे में बेहतर तरीके से जान सकते हैं. हमारे मन में हमेशा से यह जिज्ञासा रहती है कि मुसलमान कैसे इफ्तार करते हैं और क्या खाते हैं.