नई दिल्ली: बोतल बंद पानी को आप ज्यादा सुरक्षित और शुद्ध मानते हैं, लेकिन ये तथ्य गलत है. जो बोतल बंद पानी हम और आप पीते हैं, वो जब तक आप तक पहुंचता है तब तक जहर बन जाता है. जी हां, विशेषज्ञों ने इसका खुलासा किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह बोतले कंपनियों से निकलकर दुकानों और गोदामों में जाने के लिए ट्रकों में लोड होती हैं तो उस समय बाहर का तापमान अगर 35-40 डिग्री है तो ट्रक के अंदर का तापमान 50 से 60 डिग्री होता है. इस दौरान कई केमिकल से बनी प्लास्टिक की बोतलों में केमिकल मिलना शुरू हो जाता है और ये केमिकल पानी या कोल्ड ड्रिंक में मिल जाता है और वह पानी जहर हो जाता है. वही बोतल बंद पानी या कोल्ड ड्रिंक हम भरोसे के साथ पीते हैं. Also Read - दिल्ली से 1200 प्रवासी मजदूरों को लेकर बिहार के लिए रवाना हुई श्रमिक स्‍पेशल ट्रेन

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जिससे पाइप बनते हैं, उसी प्लास्टिक से बनती हैं बोतल

भारत के अधिकांश राज्यों में प्लास्टिक कंपनियां स्कूली बच्चों के प्रयोग में आने वाली प्लास्टिक की बोतलों में पीवीसी (पाइपों में प्रयोग होने वाला प्लास्टिक) और बीपीए (बिसफेनोल ए नामक एक रसायन) जैसे रसायनों का प्रयोग करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है. ‘माई राइट टू ब्रीथ’ के संस्थापक सदस्य और पर्यावरणविद् जयधर गुप्ता ने कहा कि गर्मी के दिनों में इनका प्रयोग अधिक होता है. उन्होंने कहा, “खाने से लेकर पीने की हर चीज में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है. हैरत की बात यह है कि प्रयोग होने वाली इस प्लास्टिक में 90 फीसदी से ज्यादा प्लास्टिक रिसाइकिल होने के लायक ही नहीं है.

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देश में हर रोज दो करोड़ बोतल कचरे में फेंकी में जाती हैं

पूरे भारत में हम रोजाना दो करोड़ प्लास्टिक की बोतलें कचरे में फेंकते हैं चाहे आप कहीं भी जाओं चाहे वह राजमार्ग हो, घूमने फिरने की जगह हो आपको हर जगह यह प्लास्टिक की बोतलें मिलेंगी. जयधर गुप्ता ने कहा कि आठ से 10 प्रतिशत ही यह बोतलें रिसाइकिल होती हैं बाकी लैंडफिल साइटों पर फेंक दी जाती हैं. यह प्लास्टिक बायोडिग्रेडबल नहीं है यह हजारों साल तक हमारी दुनिया में रहेंगी. जयधर गुप्ता ने कहा कि सबसे अच्छा विकल्प है कि हमें स्टील की बोतलें, थरमस का प्रयोग करना चाहिए. जब भी कहीं जाएं तो इन्हें आप अपने साथ रखें. समस्या यहीं है कि हम लोग सहुलियतों के चक्कर में होते हैं. लोग अमीर होते जाएंगे वह सहुलियतों के जाल में फंसते जाएंगे.

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प्रयोग बंद करना ही एक मात्र उपाय

प्लास्टिक की बोतलों की गुणवत्ता में सुधार के सवाल पर उन्होंने कहा, “इसमें सुधार की गुंजाइश नहीं है, इसमें सुधार करने से यह सिर्फ महंगी ही होगी. सबसे पहले तो हमें इन सबसे खुद को अलग करना है. विदेशों में भी जब कागज की थैलियों का प्रयोग किया जा सकता है तो भारत में क्यों नहीं. विदेशों में उन थैलियों के लिए पैसा लिया जाता है इसलिए लोगों ने अपनी आदत में सुधार किया है. सरकार को इसे समाप्त करने के लिए कानून बनाना चाहिए.’

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प्रदूषण करने के बदले लिए जाएं रुपए

प्लास्टिक पर लगाम लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “सरकार को चाहिए कि प्लास्टिक को एक लग्जरी चीज घोषित करें ताकि लोगों की इसकी खरीद से बचें. सिंगापुर में इस तरह की योजना है कि अगर आपको प्रदूषण करना है तो इसका पैसा दो. यह बहुत ही आसान फार्मूला है. इसे भारत में लागू किया जाना चाहिए.’

इनपुट: आईएएनएस