नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है. सज्जन कुमार ने 1984 सिख विरोधी दंगे के एक मामले में उन्हें आजीवन उम्रकैद की सजा देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सज्जन कुमार की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है. सज्जन कुमार ने अपनी याचिका में खुद को दोषी करार देने को चुनौती देते हुए सजा के निलंबन की मांग की है.

भयावह हत्याओं के चौंतीस साल बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सज्जन कुमार को 17 दिसंबर, 2018 को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. न्यायालय ने हिंसा को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ बताते हुए इसे पुलिस की मदद से राजनेताओं द्वारा निर्मित बताया था. उच्च न्यायालय ने सज्जन कुमार व पांच अन्य की रिहाई को दरकिनार करते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

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अदालत ने कुमार को आजीवन कैद की सजा सुनाते हुए कहा कि ‘अपराधी’ अभियोग व दो दशक से ज्यादा समय तक सजा से बच गए. सज्जन कुमार ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय का फैसला ‘गलत’ आधार पर दिया गया. दिल्ली छावनी के राज नगर इलाके में भीड़ द्वारा केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह व कुलदीप सिंह की हत्याओं के लिए सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. पांचों मारे गए लोग एक ही परिवार से थे. 1984 के दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या को लेकर हुए थे।