
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
31 दिसंबर 2025, यानी नए साल के जश्न के दिन देशभर के लाखों गिग वर्कर्स, डिलीवरी और टैक्सी ड्राइवर्स, ने देशव्यापी हड़ताल पर है. स्विगी, जोमैटो, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले इन वर्कर्स ने सरकार और कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आइये जानते हैं न्यू ईयर से पहले गिग वर्कर्स हड़ताल पर क्यों गए? उनकी क्या मांगे हैं? डिलिवरी और ट्रैवल प्लेटफॉर्म ने इस पर क्या कहा…
आज नए साल की पूर्व संध्या पर जब फूड और ग्रॉसरी की डिमांड सबसे ज्यादा होती है, तब गिग वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) और इफैट (IFAT) ने देशव्यापी हड़ताल बुलाई है. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में इसका व्यापक असर दिख रहा है. गिग वर्कर्स यूनियनों का कहना है कि उन्हें भारतीय कानूनों के तहत मिलने वाले बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है. यह हड़ताल केवल काम बंद करने के बारे में नहीं है, बल्कि डिजिटल इकोनॉमी में हो रहे आधुनिक शोषण के खिलाफ एक सामूहिक आवाज है.
गिग वर्कर्स ने केंद्रीय श्रम मंत्री को एक मांग पत्र भी सौंपा है. वर्कर्स ने अपनी मांगों में दावा किया कि ‘सुपरफास्ट’ डिलीवरी का दबाव उनकी जान जोखिम में डालता है. इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए. गिग वर्कर्स ने न्यूनतम वेतन की गारंटी मांग करते हुए कि उन्हें प्रति किलोमीटर कम से कम 20 रुपये का रेट मिले और महीने की न्यूनतम कमाई 40,000 रुपये सुनिश्चित की जाए. उन्हें पार्टनर के बजाय वर्कर का दर्जा दिया जाए, ताकि वे बीमा, पेंशन और मैटरनिटी लीव जैसे लाभ पा सकें. ऑटोमेटेड AI चैटबॉट्स की जगह 24 घंटे इंसानी कस्टमर सपोर्ट उपलब्ध हो, ताकि वे अपनी समस्याएं सही ढंग से बता सकें.
हड़ताल का एक बड़ा कारण प्लेटफॉर्म द्वारा ID ब्लॉकिंग की मनमानी है. तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन का आरोप है कि जब भी कोई वर्कर अपनी आवाज उठाता है, तो कंपनियां बिना किसी नोटिस के उसकी प्लेटफॉर्म आईडी ब्लॉक कर देती हैं. वर्कर्स का कहना है कि रेटिंग सिस्टम और आईडी बैन करने की प्रक्रिया ट्रांसपैरेंट नहीं है. वे मांग कर रहे हैं कि किसी भी वर्कर की आईडी ब्लॉक करने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाए.
गिग वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन के बीच स्विगी और जोमैटो ने अपनी सर्विस चालू रखने की कोशिश की है. कंपनियों ने हड़ताल को कमजोर करने के लिए आज के दिन ‘पीक-आवर इंसेंटिव’ को कई गुना बढ़ा दिया है. राइडर्स लॉग-इन करें. इसलिए कुछ शहरों में हर एक डिलीवरी में 150 रुपये तक का एक्स्ट्रा बोनस दिया जा रहा है. कंपनियों का कहना है कि वे डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं और 10-मिनट डिलीवरी केवल नजदीकी स्टोर से ही संभव की जाती है. हालांकि, कंपनियों ने आईडी ब्लॉकिंग के गंभीर आरोपों पर कुछ नहीं कहा है.
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