नई दिल्‍ली: दिल्‍ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप और मर्डर के दोषी तीन दोषियों ने अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के दरवाजे खटखटाए हैं. इन तीन आरोपियों अक्षय सिंह, पवन कुमार गुप्‍ता और विनय शर्मा ने अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट International Court of Justice (ICJ) से अपनी फांसी पर स्‍टे लगाने के लिए यह याचिका दायर की है. Also Read - शाहीनबाग: फर्नीचर की दुकान में लगी आग, मौके पर पहुंचे दमकलकर्मी, कोई हताहत नहीं

वहीं, उच्चतम न्यायालय ने सभी कानूनी विकल्पों को बहाल करने का अनुरोध करने वाली निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के दोषी मुकेश सिंह की याचिका सोमवार को खारिज कर दी है. Also Read - अगर सरकार हां करे, प्रवासियों को दिल्ली,मुंबई से पटना छोड़ आएंगे : स्पाइसजेट

दोषियों के वकील एपी सिंह ने बताया कि अप्रवासी और उनके संगठन इस पर नजर रखे हुए थे. विभिन्न संगठनों द्वारा याचिकाओं की प्रतियां आईं, जिसमें मांग की गई कि केस के रिकॉर्ड आईसीजे के समक्ष रखे जाएं, तत्काल सुनवाई की जाए और मौत की वारंट पर रोक लगाई जाए. हम भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा करते हैं, लेकिन वे नहीं करते हैं, उन्होंने आईसीजे के दरवाजे खटखटाए हैं. Also Read - दिल्‍ली में जरूरी सामान बेचने वाली दुकानें 24 घंटे खुली रहेंगी: LG अनिल बैजल

निचली अदालत ने पांच मार्च को फिर से मौत का वारंट जारी करते हुए चारों दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय सिंह को फांसी देने के लिए 20 मार्च सुबह साढ़े पांच बजे का वक्त तय किया.

सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सभी कानूनी विकल्पों को बहाल करने का अनुरोध करने वाली निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के दोषी मुकेश सिंह की याचिका सोमवार को खारिज कर दी. मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से एक मुकेश ने न्यायालय में याचिका दायर करके अनुरोध किया था कि उसके सभी कानूनी विकल्पों को बहाल किया जाए, क्योंकि उसके पुराने वकील ने उसे गुमराह किया था.

दोषी ने वकील वृंदा ग्रोवर पर लगाया था गुमराह करने का आरोप
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ने कहा कि मुकेश सिंह की याचिका विचारणीय नहीं है. पीठ ने कहा कि इस मामले में पुनर्विचार और सुधारात्मक याचिकाएं दोनों ही खारिज की जा चुकी हैं. दोषी ने अनुरोध किया है कि चूंकि उसकी पुरानी वकील वृंदा ग्रोवर ने उसे गुमराह किया है इसलिए सुधारात्मक याचिका खारिज होने के दिन से अदालतों द्वारा पारित सभी आदेशों और राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने को रद्द कर दिया जाए.