नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली में 2012 के निर्भया गैंगरेप और मर्डर के मामले में दोषियों में से एक पवन कुमार गुप्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए गुरु वार को वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश को नियुक्त किया. पवन का वकील हटाए जाने के बाद से उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा था. वहीं, कोर्ट ने चारों दोषियों को अलग अलग फांसी देने के लिए केंद्र की अपील पर सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी और इस बीच, मौत की सजा पाए इन मुजरिमों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अंजना प्रकाश को दोषी पवन कुमार गुप्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”प्रतिवादी पवन गुप्ता की ओर से हम वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश को न्याय मित्र नियुक्त करते हैं. पवन गुप्ता के इस मामले मे अंजना प्रकाश पेश होने और न्यायालय की मदद के लिए तैयार हो गईं हैं.

इस बीच, शीर्ष अदालत ने चारों दोषियों को अलग अलग फांसी देने के लिए केंद्र की अपील पर सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी और इस बीच, मौत की सजा पाए इन मुजरिमों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

अंजना प्रकाश इससे पहले इस मामले में मुकेश कुमार सिंह की ओर से पेश हुई थीं, जिसने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी.सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था.

पीठ ने निचली अदालत द्वारा बुधवार को पारित उस आदेश का भी संज्ञान लिया, जिसमे उसने पवन के पिता को दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण के वकीलों की सूची उपलब्ध कराने के लिए कहा था ताकि वह दोषी के प्रतिनिधत्व के लिए वकील का चयन कर सकें.

मुकेश की ओर से अधिवक्ता वृन्दा ग्रोवर ने कहा कि निचली अदालत ने फांसी के लिए नई तारीख देने के बारे में जेल प्राधिकारियों के आवेदन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है और इसलिए उचित होगा कि इस मामले पर शीर्ष अदालत शुक्रवार को सुनवाई करे.

पीठ ने कहा कि वह इस मामले को शुक्रवार अपराह्न दो बजे के लिए सूचीबद्ध कर रही है और उस समय तक सभी दोषी केंद्र की अपील पर अपने जवाब दाखिल करेंगे.

केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के बाद से दोषियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि किसी ने भी अभी तक सुधारात्मक याचिका या दया याचिका दायर नहीं की है.

पवन गुप्ता इस मामले में अकेला दोषी है, जिसने किसी व्यक्ति को उपलब्ध अंतिम कानूनी विकल्प-सुधारात्मक याचिका- का सहारा नहीं लिया है और न ही उसने मौत की सजा के खिलाफ दया याचिका दायर की है.

एक अन्य दोषी विनय शर्मा ने मंगलवार को दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उसी दिन शीर्ष अदालत ने इन दोषियों की मौत की सजा के अमल पर लगी रोक हटाने से इंकार करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील पर चारों दोषियों से जवाब मांगा था.

हालांकि, शीर्ष अदालत ने प्राधिकारियों को दोषियों को फांसी देने के लिए नई तारीख के लिए निचली अदालत जाने की छूट प्रदान करते हुए कहा था कि न्यायालय में लंबित केंद्र और दिल्ली सरकार की अपील इसमें बाधक नहीं होगी. निचली अदालत ने 31 जनवरी को अगले आदेश तक के लिए चारों दोषियों-मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार को फांसी देने पर रोक लगा दी थी. ये चारों दोषी इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं.

निर्भया से 16-17 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने गैंगरेप किया और दरिंदगी के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया था. निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. इन छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि छठा आरोपी किशोर था, जिसे तीन साल सुधार गृह में रखने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया.