नई दिल्ली: निर्भया के दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे दी जानी वाली फांसी का रास्ता साफ हो गया है. दिल्ली की एक अदालत ने चारों दोषियों के डेथ वारंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. अदालत के आदेश पर निर्भया की मां आशा देवी ने खुशी जताते हुए कहा, “यह पूरे देश के लिए न्याय का क्षण है.” आशा देवी ने फोन पर आईएएनएस से कहा, “आज पूरे देश को न्याय मिला है. Also Read - बेटियों के लिए न्याय की खातिर लड़ाई जारी रहेगी, आज का दिन 'न्याय दिवस' घोषित हो: निर्भया की मां

उन्होंने कहा, “यह न केवल हमारे लिए एक खुशी का पल है, बल्कि यह उन सभी परिवारों के लिए भी एक बेहद खुशी का क्षण है, जिनकी बेटी है.” अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेद्र राणा ने कहा कि निर्भया दुष्कर्म मामले के दोषियों की मौत की सजा को निलंबित करने का कोई ठोस आधार नहीं है. उन्होंने फांसी की सजा पर रोक लगाने के उनके आवेदन को खारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि दक्षिण दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म के साथ ही बर्बर हमला भी हुआ था. निर्भया की 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी. मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, पवन गुप्ता, राम सिंह और एक किशोर को इस मामले में दोषी पाया गया था. राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी और एक नाबालिग दोषी को सजा पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया था. Also Read - निर्भया के दोषी ने नाबालिग होने का दावा करते याचिका दायर की

20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी
अब चार दोषियों विनय, मुकेश, अक्षय और पवन को शुक्रवार, 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा. दोषियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ए. पी. सिंह ने आखिरी समय तक फांसी की सजा को कम कराने और मृत्युदंड में देरी के लिए कई प्रयास किए. उनके माध्यम से मौत की सजा पाए दोषियों ने दो दिन पहले ट्रायल कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. Also Read - मरते-मरते निर्भया ने मां से कहा था, 'दोषियों को मिले ऐसी सजा कि फिर न हो ऐसा अपराध'