Nirbhaya Case: साल 2012 निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों में से एक दोषी अक्षय सिंह ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पेटिशन दायर की थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि दया याचिका खारिज होने पर दखल की जरूरत नहीं. बता दें कि अक्षय सिंह ने कोर्ट में फांसी को टालने के लिए फांसी के तरीकों पर सवाल उठाया था. ऐसे में इस शनिवार को फांसी मुकर्रर करने को लेकर संशय स्थिति बनी हुई थी.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने अक्षय सिंह की याचिका को खारिज कर दिया था. इस याचिका में अक्षय ने हिंदू धार्मिक ग्रंथों का हवाला दिया था साथ ही दिल्ली प्रदूषण से धीरे-धीरे हो रही मौत को लेकर कहा था कि फांसी नहीं होनी चाहिए. क्यूरेटिव पिटीशन पर जजों द्वारा उनके चैंबर में सुनवाई किए जाने की उम्मीद है, न कि खुली अदालत में. क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने के बाद, अक्षय सिंह के पास राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को दया याचिका भेजने का विकल्प होगा.

बुधवार को शीर्ष अदालत द्वारा दोषियों में से एक मुकेश कुमार सिंह की याचिका पर फैसला सुनाया सकता है. बता दें कि मुकेश सिंह और विनय शर्मा की क्यूरेटिव पेटिशन पहले ही खारिज हो चुकी हैं. इस पूरे वाक्ये को दोषियों द्वारा फांसी की सजा को टालने के रूप में देखा जा रहा है. गौरतलब है कि सरकार ने पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मौत के मामलों में दिशा-निर्देशों में बदलाव किया जाए ताकि अपराधी कानूनी विकल्पों का फायदा उठाकर सजा में देरी न कर सकें.

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिण दिल्ली में एक 23 वर्षीय मेडिकल छात्र के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके साथ सामूहिक रूप से मारपीट की गई. सिंगापुर के एक अस्पताल में एक इलाज को दौरान उसकी मौत हो गई.