Nirbhaya Gangrape and Murder Case: फांसी पर लटकाये जाने का ‘डेथ-वारंट’ जारी होने के बाद से निर्भया के चारों दोषियों में हलचल है. तिहाड़ जेल में फांसी-घर से चंद फर्लांग की दूरी पर फंदे पर झूलने की उल्टी गिनती कर रहे हत्यारे उतनी ही ‘चुप्पी’ साधे बैठे हैं. अभी तक चार में से किसी भी मुजरिम ने तिहाड़ प्रशासन द्वारा पूछे जाने के बाद भी यह नहीं बताया है कि उनकी आखिरी ख़्वाहिश क्या है? परिवार से मिलने का समय भी नहीं बता रहे हैं. वहीं, अब तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को कह दिया है कि दोषियों के साथ ही परिजनों को भी ये बता दिया है कि वो अगर एक दूसरे से मिलना चाहें तो मिल लें, उनके पास ज़्यादा समय नहीं. तिहाड़ जेल ने दोषियों के परिजनों को पत्र भी लिखा है, जिसमें फांसी दिए जाने की तारीख और समय बताया है. तिहाड़ जेल प्रशासन का संदेश साफ़ है कि परिजन और दोषी एक दूसरे से मिलें या न मिलें, अब फांसी होगी. बता दें कि  दोषियों को फांसी 1 फरवरी को होनी है.

वहीं, दूसरी ओर, वर्ष 2012 के बहुचर्चित निर्भया बलात्कार एवं हत्याकांड में मौत की सजा मुकर्रर किये गये चार मुजरिमों में से दो के वकील ने यह आरोप लगाते हुए दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया कि तिहाड़ जेल प्रशासन कुछ खास दस्तावेजों को सौंपने में देरी कर रहा है. वकील एपी सिंह ने यह आरोप लगाते हुए अर्जी लगायी कि जेल प्रशासन ने अब तक दस्तावेज नहीं सौंपे हैं जिनकी अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन सिंह (25) के लिए सुधारात्मक याचिका दायर करने के लिए जरूरत है. इस अर्जी पर शनिवार को सुनवाई होने की संभावना है.

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तिहाड़ जेल (दिल्ली जेल) के महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा, “अदालत से डेथ-वारंट जारी होने के बाद जो कानूनी प्रक्रिया अमल में लानी चाहिए हम वो सब अपना रहे हैं. इसी के तहत चारों मुजरिमों से तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनकी अंतिम इच्छा भी कुछ दिन पहले पूछी थी. अभी तक चार में से किसी ने भी कोई जबाब नहीं दिया है.” संदीप गोयल ने आगे कहा, “जेल प्रशासन ने चारों मुजरिमों से पूछा था कि डेथ-वारंट अमल में लाए जाने से पहले वे किससे किस दिन किस वक्त जेल में मिलना चाहेंगे? संबंधित के नाम, पते और संपर्क-नंबर यदि कोई हो तो लिखित में जेल प्रशासन को सूचित कर दें. ताकि वक्त रहते अंतिम मिलाई कराने वालों को जेल तक लाने का समुचित इंतजाम किया जा सके.”

जेल महानिदेशक के मुताबिक, “नियमानुसार दूसरी बात यह पूछी गयी थी चारों से कि क्या उन्हें अपनी कोई चल-अचल संपत्ति अपने किसी रिश्तेदार, विश्वासपात्र के नाम करनी है? अगर ऐसा है तो संबंधित शख्स/रिश्तेदार का नाम पता भी जेल प्रशासन को उपलब्ध करा दें. गुरुवार तक चार में से किसी भी मुजरिम ने फिलहाल दोनों ही सवालों का जबाब नहीं दिया है. जैसे ही उनका जबाब मिलेगा, जेल प्रशासन उसी हिसाब से इंतजाम शुरू कर देगा.”

तिहाड़ जेल के एक अन्य अधिकारी ने कहा, “चारों मुजरिमों ने चूंकि दोनों में से किसी भी सवाल का जवाब अभी तक लिखित रूप से नहीं सौंपा है. लिहाजा फिलहाल उनकी जेल में बाकी कैदियों की तरह ही सप्ताह में दो दिन परिवार वालों से मिलाई करा दी जा रही है. हां, फांसी की सजा अमल में लाए जाने वाले दिन से पहले उन्हें (मुजरिमों को) अंतिम बार किससे जेल में और कब मिलना है? यह फिलहाल लंबित ही है. हालांकि अगर फांसी लगने वाले दिन से पहले तक, समुचित समय के साथ मुजरिमों ने दोनों ही सवालों का जबाब नहीं दिया, तो जेल प्रशासन मान लेगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना-सुनना है.”