आजादी के बाद पहली बार एक साथ चार लोगों को फांसी की सजा दी गई है. निर्भया के चारों दोषियों को आज सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया. पिछले तीन दशक में देश में 16 दोषियों को फांसी की सजा दी गई है. इसमें याकुब मेमन, अफजल गुरु और अजमल कसाब शामिल है. Also Read - COVID-19: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- निजी लैब्स में भी मुफ्त में हो कोरोना की टेस्टिंग

9 फरवरी 2013: इससे पहले तिहाड़ जेल में अफजल गुरु को फांसी की सजा दी गई थी. अफजल गुरु को 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले में दोषी करार दिया गया था. अफजल गुरु के बाद तिहाड़ जेल में अब तक किसी को फांसी नहीं दी गई थी. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

इससे पहले 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया था. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

31 जनवरी 1982: इंदिरा गांधी के हत्यारों से पहले तिहाड़ में रंगा और बिल्ला को एक साथ फांसी दी गई थी. ये दोनों भाई-बहन गीता और संजय चोपड़ा के अपहरण और हत्या मामले में दोषी करार दिए गए थे.

मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट मामले में याकुब मेमन को 30 जुलाई 2015 को फांसी की सजा दी गई थी. उसे 27 जुलाई 2007 को विशेष टाडा अदालत ने दोषी करार दिया था.

2008 में मुंबई पर हुए हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 में पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई. उसे दोषी करार दिए जाने के चार साल बाद फांसी दी गई.

14 अगस्त 2004: रेप के मामले में दोषी शख्स धनंजय चटर्जी को 14 अगस्त 2004 कोलकाता में फांसी दी गई थी. उसे 5 मार्च 1990 को एक स्कूली बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था.

इसी महीने गुजरात के राजकोट की एक अदालत ने 2018 में एक तीन साल की बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई है.