नई दिल्ली: निर्भया मामले (Nirbhaya Gangrape And Murder Case) में पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन मार्च को दोषियों को फांसी देने का वारंट जारी किया. वहीं, इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट में दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई हो गई है. कोर्ट ने इस पिटीशन को भी खारिज कर दिया है. बंद कमरे में सुनवाई की गई. सुनवाई न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ न्यायमूर्ति रमण के चैंबर में की. इस याचिका के खारिज होने के बाद भी दोषी पवन के पास एक और मौक़ा है. पवन का दया याचिका दायर करने का विकल्प अभी बचा हुआ है. Also Read - निर्भया कांड के 8 साल पूरे: देश में महिलाओं के प्रति कम नहीं हुई क्रूरता, पिता बोले- अभी लड़ाई बाकी है

वहीं, आज निर्भया की मां आशा देवी का रिएक्शन आया है. निर्भया की मां ने कहा- मैं 7 साल, 3 महीने से संघर्ष कर रही हूं. वो कहते हैं कि हमें माफ़ कर दो. कोई कहता है कि मेरे पति और बच्चे की क्या है. मैं कहती हूं कि मेरी बच्ची की क्या गलती थी? Also Read - Nirbhaya Case: नए कपड़े नहीं पहने, दोषी रो-रोकर लेते रहे सुनवाई की अपडेट, 'न्याय की सुबह' तक ऐसा रहा जेल और कोर्ट का हाल

बता दें कि पवन समेत तीन अन्य दोषियों को तीन मार्च को फांसी होने वाली है. पवन ने अपराध के समय खुद के नाबालिग होने का दावा करते हुए फांसी को उम्रकैद में बदलने का अनुरोध किया था. पवन ने वकील एपी सिंह के जरिए सुधारात्मक याचिका दाखिल कर मामले में अपीलों और पुनर्विचार याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को खारिज करने का अनुरोध किया था. इसी याचिका पर आज सुनवाई हुई. Also Read - तिहाड़ जेल के नाम दर्ज हुआ एक साथ चार दोषियों को फांसी देने का रिकॉर्ड

दक्षिणी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी और दोषियों ने बर्बरता करने के बाद उसे बस से फेंक दिया था. एक पखवाड़े बाद उसकी मौत हो गई.