नई दिल्ली: जैसे-जैसे रात सुबह की ओर बढ़ी, निर्भया के दोषियों की बेचैनी चरम पर पहुंच गई. रात भर जागते रहे. जैसे ही फांसी का वक़्त नज़दीक आया, दोषी विनय शर्मा जेल में ज़मीन पर लौटने लगा. वह गिड़गिड़ाकर माफ़ी मांगने लगा. जब दुनिया सो रही थी. उस समय भी फांसी के दो घंटे पहले तक फांसी को लेकर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खोल दिए गए. भोर के 3. 30 बजे पहले तक ये तय नहीं था कि आखिर दोषियों को फांसी होगी या नहीं होगी. 2. 30 बजे सुप्रीम कोर्ट ने सारी दलीलों को मानने से इंकार कर दिया. जैसे ही ये बात पता चली दोषी रोने लगे. इससे पहले वह रात 3. 30 बजे तक सुप्रीम कोर्ट की ओर आखिरी आस लिए देखते रहे और बार-बार पूछते रहे कि कोर्ट में क्या हो रहा है. क्या फैसला हुआ? Also Read - सात महीने की हिरासत के बाद रिहा होंगे उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जारी किए आदेश

निर्भया गैंगरेप व हत्या के मामले में फांसी की कतार में खडे पवन गुप्ता की एक दिन पहले राष्ट्रपति ने दया याचिका एक बार फिर खारिज कर दी थी. दोषी हाईकोर्ट पहुंच गए. हाईकोर्ट में कोई राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के चौथे दोषी की ओर से दया याचिका दायर करने में देरी दिखाती है कि कोई साजिश है और कोई व्यवस्था से खेल रहा है. हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर रात में ही दोषी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. 2.30 बजे सुप्रीम कोर्ट से फांसी पर रोक लगाने की याचिका में मांग की गई. सुप्रीम कोर्ट के ऑब्ज़र्वर ने कहा कि हम दलीलें सुनने के इच्छुक नहीं हैं. रात 2.30 बजे से स्पेशल बेंच ने दोषियों के वकील एपी सिंह की याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान निर्भया की मात और पिता भी मौजूद थे. Also Read - Coronavirus: सुप्रीम कोर्ट भी लॉकडाउन, वकीलों के चैम्बर हुए बंद, जरूरी मामलों की ही होगी सुनवाई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता गैंगरेप मामले में मौत की सजा के दोषियों की याचिका का विरोध करने व उनके फांसी पर रोक न लगाने के लिए सरकार की ओर से पेश हुए.  दोषियों की ओर से अधिवक्ता एपी सिंह ने दलील देते हुए कहा – मुझे पता है कि उन्हें फांसी दी जाएगी, लेकिन क्या यह (फांसी) पवन के बयान को दर्ज करने के लिए दो-तीन दिनों के लिए रोकी जा सकती है. एपी सिंह ने अदालत से कहा कि दोषियों के परिवार के सदस्यों को आखिरी बार 5-10 मिनट के लिए उनसे मिलने की अनुमति दें. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जेल के नियम इसकी अनुमति नहीं देते हैं और यह दोनों पक्षों के लिए दर्दनाक है. Also Read - कोरोना इफेक्ट: तिहाड़ से कैदियों की रिहाई संभव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार!

इस बीचे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दया याचिका दायर करने में काफी देरी हुई और दोषियों की ओर से पेश हुए वकील से मजबूत कानूनी बिंदु पेश करने का आग्रह किया. वकील ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह फांसी को तीन-चार दिन के लिए टाल दें ताकि वह अपने मामले से अवगत करा सकें. बहरहाल, पीठ ने कहा कि यह चौथा मृत्यु वारंट है और दोषियों की तरफ से पहले ही काफी देरी की जा चुकी है.

कोर्ट ने कहा कि आपको रोक के लिए वाजिब दलीलें देनी होंगी. अगर आप वाजिब दलीलें नहीं देंगे तो हम रोक नहीं लगा सकते. आपका ढीला-ढाला रवैया है. हम आपसे कह रहे हैं कि कृपया पॉइंट पर आइए. आप पॉइंट पर नहीं आ रहे हैं. याचिका में कोई आधार नहीं है और वकील से मजबूत कानूनी बिंदु रखने को कहा.

कोर्ट ने दोषियों के वकील से कहा कि वक्त ज़ाया नहीं करें, क्योंकि सुबह साढ़े पांच बजे याचिका निरर्थक हो जाएगी. पीठ ने कहा, ”हम उस समय के बहुत निकट हैं जब आपके मुवक्किल ईश्वर से मिलेंगे. इसलिए वक्त बरबाद नहीं करें.”

पीठ ने यह भी कहा कि चारों दोषियों को मौत की सजा की पुष्टि पर उच्चतम न्यायालय का फैसला अंतिम है और हम उसकी समीक्षा नहीं कर सकते. पीठ ने कहा, ”हम यह नहीं कह सकते हैं कि मृत्यु वारंट को लागू नहीं किया जाए, क्योंकि अक्षय की पत्नी की तलाक की अर्जी लंबित है.” कोर्ट ने सभी दलीलें खारिज कर दी. यह सुनवाई लगभग 3:30 बजे तक चली.

और आखिरकार दोषी अपनी फांसी रुकवाने में नाकामयाब हो गए. 5. 30 बजे पवन जल्लाद ने उन्हें फंदे पर लटका दिया.