नई दिल्‍ली: निर्भया गैंगरेप एवं मर्डर मामले के दोषियों में से एक पवन गुप्ता की फांसी के फंदे से बचने की आखिरी कोशिश भी गुरुवार को नाकाम हो गई. कल यानि शुक्रवार को निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दी जानी है. सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार यानि 19 मार्च को निर्भया मामले के दोषी पवन गुप्ता की उस सुधारात्मक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को नाबालिग बताया था. वहींं, उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद निर्भया मामले के दोषी मुकेश सिंह ने उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए दावा किया कि दिसंबर 2012 में हुए अपराध के समय वह दिल्ली में नहीं था. Also Read - No Parking No Car: दिल्ली मे कार लेने से पहले दिखाने होंगे पार्किंग के सबूत वरना नई कार के लिए करना पड़ेगा 15 साल का इंतजार

दरअसल, पवन गुप्ता ने आखिरी प्रयास के तहत बीते 17 मार्च सुप्रीम कोर्ट में एक सुधारात्मक याचिका दायर की थी. पवन गुप्ता ने यह सुधारात्मक याचिका उस पुनर्विचार याचिका को खारिज किये जाने के खिलाफ दायर की थी, जिसमें उसके किशोर होने का दावा खारिज किया गया था. Also Read - प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पर्याप्त नियमन मौजूद, डिजिटल मीडिया का नियमन पहले हो: केंद्र

बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने पांच मार्च को चार दोषियों विनय (26), अक्षय कुमार सिंह (31), मुकेश कुमार सिंह (32) और पवन कुमार गुप्ता (26) को 20 मार्च को फांसी पर लटकाने के लिए मौत का वारंट जारी किया था. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने टीवी शो पर लगाई फटकार, कहा- अन्य नागरिक के जैसा है पत्रकार, अमेरिका की तरह कोई अलग से स्वतंत्रता नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार यानि 18 मार्च को निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या के चार में से एक दोषी मुकेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया था. इस याचिका में उसने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिनमें उसके इस दावे को खारिज किया गया था कि 16 दिसंबर 2012 को जब जुर्म हुआ तब वह दिल्ली में नहीं था.

न्यायमूर्ति ब्रृजेश सेठी ने कहा था कि निचली अदालत के विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है. हाईकोर्ट  ने आगे कहा कि यह बताने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि इस मामले में मुकदमा किसी भी साक्ष्य को छिपाने के कारण प्रभावित हुआ. हाईकोर्ट ने मुकेश सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा, “ निचली अदालत की ओर से पारित किए गए आदेश में कोई झोल, अवैधता या अनियमितता नहीं है. निचली अदालत ने मंगलवार को उसकी याचिका को खारिज कर दिया था और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा था कि उसके वकील को परामर्श दिया जाए.

वहीं, 2012 की दिल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मां आशा देवी ने कहा, कोर्ट ने उन्हें इतने अवसर दिए कि उन्हें फांसी से आगे कुछ लाने और इसे स्थगित करने की आदत हो गई है. अब, हमारे न्यायालय अपनी रणनीति से अवगत हैं. निर्भया को कल न्याय मिलेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी को दोषी पवन गुप्ता की उस समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अदालत के उस फैसले की समीक्षा करने की अपील की थी, जिसमें उसके नाबालिग होने के दावे को 20 जनवरी को खारिज कर दिया गया था. पुनर्विचार याचिका न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना ने चैंबर में सुनवायी करके खारिज कर दी थी.

कोर्ट ने डेथ वारंट को तीन बार इस आधार पर टाल दिया गया था कि दोषियों के सभी कानूनी उपाय खत्‍म नहीं हुए हैं और एक या अन्य दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है.

दिल्ली में 23 साल की छात्रा के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात को एक चलती बस में बर्बरता के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. इस घटना के करीब 15 दिन बाद पीड़िता की सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. इस घटना ने देश को हिला दिया था. पीड़िता को को निर्भया नाम से जाना गया.

इस मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें एक नाबालिग शामिल था. वहीं, छठे व्यक्ति राम सिंह ने मामले में सुनवाई शुरू होने के कुछ समय बाद खुदकुशी कर ली थी. वहीं, नाबालिग को 2015 में रिहा कर दिया गया था. उसने सुधार गृह में तीन साल का समय बिताया था.