नई दिल्ली। साल 2012 में दिल्ली गैंग रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. तीनों दोषियों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता को फांसी की सजा को अदालत ने बरकरार रखा है. चौथे दोषी अक्षय ठाकुर ने समीक्षा याचिका दायर नहीं की थी. यानी चारों दोषियों को मौत की सजा पर आखिरी मुहर लग गई है. इस मामले में कुल 6 आरोपी थी. पांचवां आरोपी राम सिंह दो साल पहले ही तिहाड़ जेल में फांसी लगा चुका है. छठा आरोपी नाबालिग था जिसने सबसे ज्यादा क्रूरता की थी, उसे तीन साल के लिए जुवेनाइल होम में भेजा गया था और पहले ही रिहा हो चुका है. Also Read - आर्मी में वुमन ऑफिसर्स के स्थायी कमीशन का मामला: SC ने केंद्र को दिया एक माह का समय

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कोर्ट ने कहा, पुनर्विचार का कोई आधार नहीं Also Read - ICAI CA Exam: आईसीएआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सीए परीक्षा के आयोजन की व्यवहार्यता पर करेंगे विचार, जानें कब से होगा एग्जाम

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने दोषी मुकेश , पवन गुप्ता और विनय कुमार की याचिकायें खारिज करते हुये कहा कि पांच मई , 2017 के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिये कोई आधार नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई है वे उसके निर्णय में साफ तौर पर कोई भी त्रुटि सामने रखने में विफल रहे हैं.

अदालत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान तीनों दोषियों का पक्ष विस्तार से सुना गया था और अब मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए कोई मामला नहीं बनता है. इस सनसनीखेज अपराध में चौथे मुजिरम अक्षय कुमार सिंह ने मौत की सजा के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर नहीं की थी.

राजधानी में 16 दिसंबर , 2012 को हुये इस अपराध के लिये निचली अदालत ने 12 सितंबर , 2013 को चार दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी. इस अपराध में एक आरोपी राम सिंह ने मुकदमा लंबित होने के दौरान ही जेल में आत्महत्या कर ली थी जबकि छठा आरोपी एक किशोर था. दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 मार्च , 2014 को दोषियों को मृत्युदण्ड देने के निचली अदालत के फैसले की पुष्टि कर दी थी. इसके बाद दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थीं जिन पर अदालत ने पांच मई , 2017 को फैसला सुनाया था.

पिता ने पूछा, कब होगी इन्हें फांसी?

फैसला आने के बाद निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, हमें पता था कि उनकी याचिका खारिज होगी. लेकिन अब आगे क्या होगा? अब तक काफी समय बीत चुका है और महिलाओं को खतरा बढ़ता ही जा रहा है. मुझे भरोसा है कि जल्द उन्हें फांसी होगी. वहीं, मां आशा देवी ने कहा कि हमारा संघर्ष यहां खत्म नहीं होगा.न्याय मिलने में देरी हो रही है. इससे समाज की महिलाओं का नुकसान हो रहा है. मैं न्यायपालिका से अपील करती हूं कि न्यायिक तंत्र को मजबूत बनाएं. गुनहगारों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाकर निर्भया को इंसाफ दें.

16 दिसंबर 2012 की घटना

ये चारों 16 दिसंबर, 2012 में चलती बस में 23 साल की पैरा-मेडिकल छात्रा निर्भया से गैंगरेप और उसकी हत्या के आरोपी हैं. घटना के 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी. अभियुक्तों के वकील ने याचिका में कहा था कि असली अपराधियों को गिरफ्तार करने में असफल होने के बाद पुलिस ने निर्दोष लोगों को फंसाया. शीर्ष अदालत ने पांच मई, 2017 को चार अभियुक्तों की मौत की सजा को बरकरार रखा था.

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निर्भया कांड: कब क्या क्या हुआ?  

– 23 वर्षीया पैरामेडिकल छात्रा के साथ 16 दिसंबर, 2012 को चलती बस में गैंग रेप किया गया था

— 16 दिसंबर की रात पांच दरिंदों ने 23 वर्षीया निर्भया के साथ क्रूरतम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया था

– जिसके चलते 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी

– दुष्कर्म की इस घटना के प्रति देशभर में गुस्सा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था

– निर्भया ने मौत से 13 दिन तक जूझते हुए इलाज के दौरान सिंगापुर में दम तोड़ दिया था

– इस भयानक हादसे के बाद राजधानी को ‘दुष्कर्म की राजधानी’ की संज्ञा दी जाने लगी.

पूरे देश में थी गुस्से की लहर

इस घटना से पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई थी. इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों ने बड़ा प्रदर्शन किया था जिस पर पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की थी. इसे लेकर दिल्ली पुलिस की खूब आलोचना हुआ थी. तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार भी जनता के निशाने पर रही. इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने रेप के मामलों से निपटने के लिए सख्त कानून बनाया और नाबालिग पर केस चलाने की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल कर दी. इसी केस की रोशनी में पोक्सो एक्ट भी लाया गया.