Nirbhaya Gangrape and Murder Case: निर्भया गैंगरेप मर्डर केस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने डेथ वारंट पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. चार में से एक दोषी मुकेश डेथ वारंट (Death Warrant) पर रोक लगाने की मांग को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था. मांग पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मुकेश को निचली अदालत जाना चाहिए. पटियाला हाउस कोर्ट में ही अर्जी देनी चाहिए. बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने ही 7 जनवरी, 2020 को निर्भया मामले के चारों दोषियों के लिए डेथ वारंट जारी किया था. चारों को 22 जनवरी, 2020 को फांसी दी जानी है. डेथ वारंट जारी होने के बाद दो दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन जारी की थी. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition) भी खारिज कर चुका है. अब दोषियों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका (Mercy Petition) का विकल्प बचा है. आज जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुनवाई की. Also Read - 'सेम सेक्स' मैरेज का केंद्र सरकार ने किया विरोध, कहा- समलैंगिकों का साथ रहना फैमिली नहीं

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दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में मुकेश ने कहा था कि उसने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की है, ऐसे में जब तक दया याचिका का निपटारा नहीं हो जाता तब तक उसकी फांसी पर कोर्ट रोक लगाए. अगर राष्ट्रपति दया याचिका को खारिज भी करते हैं तो भी उसे राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने के लिए समय दिया जाए. मुकेश ने अपनी याचिका में ये भी कहा है कि अगर राष्ट्रपति उसकी दया याचिका को खारिज करते हैं तो उसे वो हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा. Also Read - UPSC Exam: UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को झटका, नहीं मिलेगा अतिरिक्त मौका

आपको बता दें कि 14 जनवरी 2020 दिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दो दोषी विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर दी थी. इस मामले में चार दोषी हैं, जिनमें से दो हत्यारों ने ही क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, बाकि दो दोषी बाद में क्यूरेटिव याचिका दायर कर सकते हैं. ये याचिका दायर करने में देरी की वजह फाँसी की सजा को और कुछ दिन टालने की कोशिश होगी. क्यूरेटिव याचिका के बाद दोषियों के पास राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर करने का क़ानूनी अधिकार बचा है.

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका 18 दिसंबर को ख़ारिज की थी, अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ख़ारिज कर चुका था, जिसके बाद सात जनवरी को दिल्ली पटियाला हाउस की ट्रायल कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को फाँसी पर लटकाने के लिए डेथ वांरट जारी कर दिया था.यह वारंट निरभया की माँ की अर्ज़ी पर जारी हुआ था, अर्ज़ी में ट्रायल कोर्ट से माँग की गई थी कि सात जनवरी को दोषियों की कोई भी याचिका सुप्रीम कोर्ट में या राष्ट्रपति के पास लंबित नहीं है इसलिए ट्रायल कोर्ट फाँसी की सजा को तामील में लाने के लिए कार्रवाई करें.