Nirbhaya Gangrape Murder Case: निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले (Nirbhaya Gangrape Murder Case) के चारों दोषियों को फांसी दे दी गई है. आज सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में इन चारों को फांसी पर लटकाया गया. इससे पहले बीती रात में चले ड्रामे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

पहले भी हो चुकी है एक साथ चार लोगों को फांसी
निर्भया केस के चारों गुनहगारों मुकेश, अक्षय सिंह, पवन और विनय को फांसी दी गई. ये चारों तिहाड़ जेल में बंद थे. ये पहला मौका नहीं है जब एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई. इससे पहले भी एक बार ऐसा हो चुका है. इससे पहले 27 नवंबर 1983 को जोशी अभयंकर मामले में एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई थी. जोशी अभयंकर मामला दस लोगों की हत्या से जुड़ा था. ये मामला इतना बड़ा था कि कोर्ट ने इस कृत्य के लिए चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी और चारों को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई थी. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

रेप के मामले में एक साथ चार को फांसी देने का ये पहला मौका
पहले चार लोगों को फांसी तो दी जा चुकी है, लेकिन ये पहला मौका है जब रेप के मामले में एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई. रेप के मामले में पिछली बार फांसी 2004 में दी गई थी. पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी. धनंजय ने 14 साल की लड़की की रेप के बाद बेरहमी से हत्या की थी. इसके बाद धनंजय को फांसी की सजा सुनाई गई थी. ये मामला 14 साल चला था. धनंजय को फांसी कोलकाता की अलीपुर जेल में दी गई थी. धनंजय को सुबह चार बजे जल्लाद ने फांसी पर लटका दिया था. इस काम को कोलकाता के जल्लाद नाटा मलिक ने अंजाम दिया था. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या