नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में फांसी की सजा पाए चार दोषियों में से एक पवन कुमार गुप्ता बुधवार को दिल्ली की एक अदालत पहुंचा और दो पुलिस कान्स्टेबल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. पवन कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि वह गत वर्ष जब मंडोली जेल में बंद था, तब दोनों कॉन्स्टेबल ने उसे पीटा था. Also Read - अगर सरकार हां करे, प्रवासियों को दिल्ली,मुंबई से पटना छोड़ आएंगे : स्पाइसजेट

पवन कुमार गुप्ता के वकील एपी सिंह ने बताया कि कड़कड़डूमा स्थित मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट की अदालत पवन की शिकायत पर गुरुवार को दोपहर दो बजे सुनवाई करेगी. Also Read - दिल्‍ली में जरूरी सामान बेचने वाली दुकानें 24 घंटे खुली रहेंगी: LG अनिल बैजल

शिकायत में हर्षविहार पुलिस थाने के एसएचओ को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह कान्स्टेबल अनिल कुमार और एक अन्य अज्ञात कॉन्स्टेबल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करें. शिकायत में कहा गया है कि चूंकि पवन को जल्द फांसी दी जानी है, यह जरूरी है कि उसे दोनों पुलिसकर्मियों की पहचान के लिए एक गवाह के तौर पर पेश होने की इजाजत दी जाए. Also Read - कोरोना वायरस: लोगों की मदद के लिए सामने आया Big Bazaar, इन राज्यों में शुरू की Doorstep Delivery सर्विस

आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पवन को दोनों कान्स्टेबल ने 26 जुलाई और 29 जुलाई, 2019 को बुरी तरह से पीटा था, जब वह पूर्वी दिल्ली के मंडोली केंद्रीय जेल में बंद था.

इसमें कहा गया है कि सिर में कथित चोट के लिए उसका इलाज शाहदरा में गुरु तेग बहादुर सरकारी अस्पताल में कराया गया और उसे 14 टांके लगे. इसमें दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ शारीरिक हमले से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है.

बता दें कि गत पांच मार्च को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा की अदालत ने पवन कुमार गुप्ता सहित चार दोषियों को 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने के लिए ताजा मृत्यु वारंट जारी किए थे. इन चार दोषियों में मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) शामिल हैं.

23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न से 16 दिसंबर 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में सामूहिक बलात्कार और हमला किया गया था. घटना के लगभग 15 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी.