नई दिल्ली: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वैश्विक वित्तीय स्थिति पर एक पुस्तक का विमोचन किया और कहा कि इसमें उन चुनौतियों के समाधान का सुझाव दिया गया है जिनका वर्तमान में दुनिया और भारतीय अर्थव्यवस्था सामना कर रही है. ‘द राइज ऑफ फाइनेंस: कॉजेज, कॉन्सीक्वेन्सेज एंड क्योर (The Rise of Finance: Causes, Consequences and Cure)’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘यह दुनिया और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों को मौजूदा आर्थिक स्थिति को समझने में मदद करेगी.’’ इस पुस्तक के सह-लेखक वी अनंत नागेश्वरन और गुलजार नटराजन हैं. नागेश्वरन क्रिया विश्वविद्यालय में आईएफएमआर ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन हैं. नटराजन वैश्विक नवोन्मेष कोष के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक हैं. Also Read - GDP 3rd Quarter Results: देश की अर्थव्यवस्था ने 'मंदी' को पीछे छोड़ा, दिसंबर तिमाही में 0.4% बढ़ी इकोनॉमी

Also Read - Private Banks Can Get Govt Business: अब कर संग्रह, पेंशन भुगतान और लघु बचत योजनाओं जैसे काम भी करेंगे निजी बैंक

भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में हर राज्य, हर जिले की भूमिका: पीएम मोदी Also Read - Privatisation of PSU Banks: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण क्यों करना चाहती है भारत सरकार?

इसी बीच कुछ दिनों पहले सरकार ने अटकी परियोजनाओं में फंसे मकान खरीदारों और रीयल एस्टेट कंपनियों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 1,600 अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिये 25,000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित करने का निर्णय किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्णय की जानकारी देते हुए संवाददाताओं से कहा कि सरकार इस वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में 10,000 करोड़ रुपये डालेगी जबकि शेष 15,000 करोड़ रुपये का योगदान स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की ओर से किया जाएगा. इससे कोष का समूचा आकार 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का हो रहा प्रयास, अब काजू की खेती से सुधरेगी हालत