नई दिल्ली. नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया यानी नीति आयोग ने विकास की दौड़ में पीछे छूट गए देश के जिलों की रैंकिंग शुरू कर दी है. आयोग इन जिलों के प्रदर्शन में सुधार के लिए इस तरह की रैंकिंग कर रहा है. इसकी पहली लिस्ट में देश के 101 जिलों को रखा गया है. आयोग के अनुसार ये जिले देश के अन्य जिलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम विकसित हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के पिछड़े जिलों के विकास के लिए इसी साल जनवरी में ‘ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स’ नाम से योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत नीति आयोग द्वारा घोषित इन सभी 101 पिछड़े जिलों को ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट’ कहा जाएगा.Also Read - Rajasthan School Reopening: राज्य में जल्द ही खोले जाएंगे प्राथमिक विद्यालय? नीति आयोग ने की सिफारिश

विकास के लिए आगे बढ़ने की प्रतिस्पर्धा
नीति आयोग देश के पिछड़े जिलों की रैंकिंग कुल 81 में से 49 संकेतकों (इंडीकेटर्स) के आधार पर करेगा. ये संकेतक विकास के पांच मूलभूत तत्वों- सेहत, पोषण, शिक्षा, कृषि तथा जल संसाधन, वित्तीय समावेश, कौशल विकास और मूल बुनियादी ढांचा क्षेत्र को शामिल करेंगे. आयोग के अनुसार प्रदर्शन के आधार पर इन जिलों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा होगी. इसके लिए आयोग एक निगरानी तंत्र भी बना रहा है, जो इन जिलों की रैंकिंग के दौरान वास्तविक समय पर डाटा जमा करेगा. पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए आयोग अगले वित्त वर्ष की पहली तारीख यानी एक अप्रैल से एक ‘डैशबोर्ड’ भी शुरू कर रहा है. इस कार्यक्रम के तहत केंद्र एवं राज्यों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल, केंद्र, राज्य स्तर के प्रभारी अधिकारियों तथा जिला कलेक्टरों के बीच गठजोड़ एवं जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है. इस कार्यक्रम में प्रत्येक जिलों को मजबूत बनाने, प्रगति को गति देने तथा उनकी रैंकिंग पर ध्यान दिया जाएगा. Also Read - Niti Aayoag: नीति आयोग ने ईवी चार्जिग पॉइंट स्थापित करने के लिए गाइड जारी की

देश की आर्थिक प्रगति के लिए हो रही रैंकिंग
पिछड़े जिलों की रैंकिंग की शुरुआत करते हुए नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा, ‘भारत के ये जिले जब तक आगे नहीं बढ़ते, देश उच्च दर से आर्थिक वृद्धि हासिल नहीं कर सकता. वृद्धि दर कितनी भी ऊंची क्यों न हो, उसका लाभ जब तक निचले स्तर तक नहीं जाता, उसका कोई मतलब नहीं है.’ उन्होंने कहा कि आयोग ने इसके साथ ही इसी साल मई से जिलों में होने वाली प्रगति के आधार पर उनकी रैंकिंग (डेल्टा रैंकिंग) जारी करने की भी व्यवस्था की है. इससे जिले बेहतर गतिविधियों को अपनाकर एक-दूसरे के अनुभव से सीख सकते हैं. अमिताभ कांत ने कहा कि आयोग की इस रैंकिंग की पहल में पश्चिम बंगाल और केरल को छोड़कर देश के सभी राज्य शामिल हैं. इन दोनों राज्यों के भी जल्दी ही इससे जुड़ने की संभावना है. Also Read - Delhi Unlock Update: केजरीवाल सरकार से बोले नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, अगले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण

आधार रैंकिंग में आंध्रप्रदेश आगे, हरियाणा सबसे पीछे
नीति आयोग की आधार रैंकिंग के तहत आंध्र प्रदेश का विजयनगरम सर्वाधिक 48.13 अंकों के साथ सर्वोच्च स्थान पर है. वहीं राजधानी दिल्ली से सटा हरियाणा का मेवात 26.02 अंक के साथ सबसे पीछे है. शीर्ष स्थान पर आने वाले अन्य जिलों में राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) उस्मानाबाद (महाराष्ट्र), कुडप्पा (आंध्र प्रदेश), रामनाथपुर (तमिलनाडु), उद्यम सिंह नगर (उत्तराखंड), महासमुंद (छत्तीसगढ़), खम्मम (तेलंगाना) और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) शामिल हैं. वहीं, दूसरी तरफ आसिफाबाद (तेलंगाना), सिंगरौली (मध्य प्रदेश), श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर (उत्तर प्रदेश), नामसाई (अरुणाचल प्रदेश) तथा सुकमा सूची में निचले पायदान पर हैं.

(इनपुट भाषा)