
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ विधायक नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह फैसला उनकी लंबे समय से चली आ रही संगठनात्मक पकड़, जमीनी अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए लिया गया. 45 वर्षीय नितिन नबीन को बीजेपी के भरोसेमंद चेहरों में गिना जाता है. शहरी राजनीति और संगठन प्रबंधन के मामले में उनकी अच्छी पकड़ है. आइए इस खबर में जानते हैं नितिन नबीन के प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में-
नितिन नबीन का जन्म 23 मई, 1980 को पटना में हुआ था. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पटना में ही की, जबकि 12वीं की शिक्षा उन्होंने दिल्ली के सी.एस.के.एम. पब्लिक स्कूल से पूरी की. पढ़ाई के दिनों से ही नितिन को सामाजिक और राजनीतिक कामों में दिलचस्पी थी. युवावस्था में ही उन्होंने राजनीति को करियर के रूप में चुना और युवा संगठनों के जरिए अपनी पहचान बनाई. उनकी पर्सनैलिटी में अनुशासन और संतुलन साफ नजर आता है, जो उनकी शिक्षा और शुरुआती प्रशिक्षण का असर माना जाता है.
यही नहीं नितिन राजनीति में विरासत लेकर आए, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई. उनके पिता स्वर्गीय नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक थे. उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और ईमानदार जननेता की रही. 2006 के उपचुनाव में नितिन नबीन ने पहली बार जीत दर्ज की. 2008 के परिसीमन के बाद बने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया, जिसे उन्होंने लगातार मजबूत जनसमर्थन के जरिए सही साबित किया.
2010, 2015, 2020 और अब 2025 तक लगातार जीत हासिल करना किसी भी नेता के लिए बड़ी उपलब्धि है. नितिन की जाति कायस्थ बताई जाती है, जो शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली मानी जाती है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कई जगहों पर कायस्थ वोटों में असंतोष देखने को मिलता है, वहीं बांकीपुर में नितिन ने इस वर्ग को एकजुट रखा. उनका शांत स्वभाव और विवादों से दूरी ही नितिन को समाज का स्वाभाविक नेता बनाता है.
इस समय नितिन नबीन बिहार सरकार में रोड कंस्ट्रक्शन मंत्री हैं और उनके कामकाज को लेकर शहरी इलाकों में सकारात्मक राय देखने को मिलती है. चुनावी हलफनामों के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 1.75 करोड़ रुपये बताई जाती है. बांकीपुर जैसे शहरी क्षेत्र में सड़क, सफाई, जल-निकासी, बिजली और ट्रैफिक जैसी मूलभूत समस्याओं पर उनका फोकस बीजेपी के लिए भी राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है.
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