नई दिल्ली| बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिये बिहार की नीतीश सरकार ने शराबबंदी के बाद अब बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान शुरू किया है. इसके तहत राज्य में बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिये सरकार ने शादी कराने वाले पंडितों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि उन्हें ये प्रशासन को लिखित देना होगा कि जिस कन्या की उन्होंने शादी कराई वह बालिग मतलब उसकी उम्र अठारह साल या उससे अधिक थी.

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इससे बाल विवाह पूरी तरह से खत्म तो नहीं होगा लेकिन काफी हद तक अंकुश लगेगा. बिहार सरकार ने इस साल दो अक्टूबर से इस अभियान की शुरुआत की है. सरकार का कहना है कि इसके अलावा और भी कई तरीकों पर विचार किया जा रहा हैं जिसमें आधार कार्ड और जहां शादी हो रही हैं, वहां ख़ासकर कन्या का घर जहां हो वहां के वॉर्ड काउन्सलर से भी लिखित में ये अंडरटेकिंग लिया जाए.

फिलहाल सरकार के इस अभियान का असर अब राज्य के शहरों से लेकर गांवों तक में देखने को मिल रहा है. दहेज और बाल विवाह के खिलाफ ग्रामीण न केवल सामाजिक स्तर पर विरोध कर रहे हैं, बल्कि कई मामलों में पुलिस को भी इसकी सूचना दे रहे हैं. इन कुरीतियों के खिलाफ आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ी है.

वैशाली जिले के देसरी प्रखंड के चौनपुर नन्हकार गांव में गुरुवार की रात दो नाबालिग बहनों की शादी मुखिया और ग्रामीणों के हस्तक्षेप से रुकी. गांव के राम बाबू पासवान अपनी 15 वर्षीय और 13 वर्षीय दो पुत्रियों की शादी दोगुने उम्र के लड़कों के साथ अपने घर पर ही कर रहे थे. इसकी जानकारी गांव के लोगों को मिल गई. ग्रामीणों ने इसकी सूचना मुखिया सुबोध ठाकुर को दी. मुखिया ने भी आगे बढ़कर बाल विवाह का विरोध किया और शादी रोकी गई.

शादी रुकने के बाद चाइल्ड लाइन परामर्श केंद्र के सदस्यों ने भी लड़कियों और उसके माता-पिता को समझाया. अब रामबाबू बालिग होने पर ही लड़कियों की शादी करने की बात कर रहे हैं. इसी तरह कटिहार जिले के फलका के समलतियां गांव में भी एक नाबालिग लड़की की शादी ग्रामीणों ने रोक दी.

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पुलिस के अनुसार, फलका के ठाकुरबाड़ी मंदिर में एक नाबालिग लड़की की शादी जबरन उससे दोगुने उम्र के पुरुष (समस्तीपुर निवासी मदन सहनी) से करवाया जा रहा था, जिसकी सूचना ग्रामीणों को मिल गई. ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दे दी. फलका थाना के सहायक अवर निरीक्षक फैयाज खान ने बताया कि दूल्हे और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है.

क्या सिर्फ हिंदू धर्म पर लागू होगा नियम?

हालांकि सरकार के आदेश से ये बात साफ नहीं हो सकी है कि यह नियम मुस्लिम समुदाय के मौलाना या क्रिश्चयन समुदाय के पादरी पर भी क्या लागू होगा. फिलहाल राज्य में धार्मिक न्यास बोर्डों के जरिए पंडितो की सूची बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

बिहार में बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है. राज्य सरकार का दावा है कि इस मुद्दे पर जागरूकता के लिए कई कदम उठाये गए हैं जिनमें कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीण इलाक़ों में लोगों के बीच जाके बाल विवाह के नकारात्मक असर के बारे में लोगों को बताना मुख्य काम हैं. राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर अगले साल 21 जनवरी को एक मानव सृंखला का भी आयोजन किया है.