पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि प्रदेश के करीब 6,000 पंचायतों में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोले जा चुके हैं और अप्रैल 2019 तक प्रदेश की सभी पंचायतों में 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर पर आयोजित शिक्षा दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नीतीश ने कहा कि जब हमने काम संभाला तो प्रजनन दर 4.3 था जो अब घटकर 3.3 पर आ गया है. उन्होंने कहा कि हर दस साल पर बिहार की आबादी करीब 24 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. एक किलोमीटर के अंदर हमारी जो आबादी है वह सिंगापुर को छोड़कर दुनिया के अन्य किसी भी स्थान पर नहीं है.Also Read - रेखा कुमारी उर्फ बुआ की करतूतों से जागी बिहार सरकार, अब ऑर्केस्ट्रा संचालकों पर नजर रखेंगे डीएम और एसपी

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नीतीश ने कहा कि प्रजनन दर को कम करने के लिए हमलोगों ने प्रत्येक पंचायत में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोलने का निर्णय लिया क्योंकि अध्ययन से पता चला कि जहां लड़की इंटर पास है तो देश का प्रजनन दर 1.7 है. उन्होंने कहा कि इसे देखते हुये करीब 6,000 पंचायतों में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोले जा चुके हैं और अप्रैल 2019 तक बिहार की सभी पंचायतों में 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. नीतीश ने कहा कि बिहार का ‘ग्रॉस एनरॉलमेंट रेशियो’ 13.5 है, जबकि देश का 24 प्रतिशत. Also Read - Corona Virus In India: बिहार के बाद यूपी के गाजीपुर में भी गंगा में तैरती मिलीं दर्जनों लाशें, डीएम ने कही ये बात..

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उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि बिहार का ‘ग्रॉस एनरॉलमेंट रेशियो’ 30 प्रतिशत से कम न हो जिसको देखते हुए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की गयी है. इस योजना के तहत राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से इंटर से आगे की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण दिया जा रहा है. काफी संख्या में इस योजना का लाभ अब छात्र लेने लगे हैं. नीतीश ने कहा कि 2007 में हमलोगों ने बिहार में मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस के मौके पर शिक्षा दिवस का आयोजन शुरू किया और इसके राष्ट्रव्यापी आयोजन के लिए हमने केंद्र को पत्र लिखकर आग्रह किया, जिसके बाद वर्ष 2008 से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई.

उन्होंने कहा कि सर्वधर्म समभाव के पक्षधर मौलाना अबुल कलाम आजाद ने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई में अपनी महती भूमिका निभाई बल्कि आजादी के दिनों में संघर्षशील रहते हुए देश का विभाजन न हो इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की. उनकी अपील पर ही यहाँ से बाहर जाने का सिलसिला बंद हुआ, यह अपने आप में बहुत बड़ी चीज है. नीतीश ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और शिक्षा के विकास में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने जो काम किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए ही हमलोग हर वर्ष शिक्षा दिवस का आयोजन करते हैं.

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उन्होंने कहा कि मौलाना अबुल कलाम के जीवन-दर्शन पर आधारित पुस्तक को स्कूली बच्चों के बीच वितरित कराने के साथ ही उनकी जीवनी को कक्षा आठ के सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी उनके व्यक्तित्व-कृतित्व से भलीभांति अवगत हो सकें.

नीतीश ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद महिलाओं की शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के पक्षधर थे. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मौलाना अबुल कलाम आजाद के विचारों को ध्यान में रखते हुए ही विगत 14 वर्षों में बिहार में विकास के कार्य किए गए.