बिहार में पूर्ण रूप से शराब पर बंदी को लेकर नीतीश सरकार शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। लेकिन अब सरकार ने इस कानून में बदलाव करने का मन बना लिया है। सरकार ने इस कानून में बदलाव के लिए जनता से सुझाव भी मांगे हैं।

मद्य निषेध कानून में बदलाव के लिए जनता की राय और सुझाव सरकार ने ईमेल और फोन के माध्यम से मांगे हैं। इसके लिए अखबार में बाकायदा विज्ञापन भी निकाला गया है। फोन के माध्यम से सुझाव देने के लिए सरकार ने कुछ अधिकारियों के मोबाइल नं. जारी किए हैं। इन नम्बरों पर आप फोन के माध्यम से कानून में बदलाव के संबंध में सुझाव दे सकते हैं।

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के मद्देनजर नीतीश कुमार ने अपनी विधिक सलाह समिति के साथ विस्तृत चर्चा की। इस मामले में सरकार की ओर से गोपाल सुब्रह्मण्यम कोर्ट में पक्ष रखेंगे। इसके लिए गोपाल ने अपनी नियमित फीस न लेकर सिर्फ एक रुपए टोकन शुल्क लिया है। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देने पर चुनाव हो सकता है रद्द

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल माह में बिहार सरकार ने राज्य में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद से अब तक 16 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इस मामले में सजा होने पर 10 साल तक सजा का प्रवधान भी है। इतना ही नहीं इस कानून के तहत अगर किसी के घर में शराब पाई जाती है और उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता तो उस घर के वयस्क को भी जेल में डाला जा सकता है।

इस तरह के कानून के कारण नीतीश सरकार की मीडिया और जनता के बीच जमकर आलोचना हुई। अब इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट का आना है।