नई दिल्ली. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर भाजपा को चिढ़ाने में कामयाब रहे हैं. कुछ ही दिनों पहले केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना को खारिज करते हुए बिहार में उन्होंने राज्य के किसानों के लिए फसल बीमा योजना लॉन्च की थी. इसे केंद्र की मोदी सरकार के उलट, बेहतर योजना बताया गया था. अबकी बार नीति आयोग की बैठक के बहाने नीतीश कुमार ने पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी किसान कर्ज माफी योजना को निशाने पर लिया है. रविवार को नीति आयोग के संचालन परिषद की चौथी बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कृषि से आय बढ़ने का संकेत नहीं मिल रहा है. उन्होंने कृषि कर्ज माफी को ‘प्रतिगामी कदम’ बताया और केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना में खामी का उल्लेख किया. उन्होंने नीति आयोग की बैठक में मध्याह्न भोजन योजना के तहत खाना बनाने की परंपरा की जगह लाभ का प्रत्यक्ष अंतरण करने की मांग की. यही नहीं, नीतीश कुमार ने इसी बैठक के बहाने अपनी पुरानी मांग, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की भी वकालत की.

कृषि से आय नहीं बढ़ना सरकार के लिए चुनौती
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में अपने संबोधन में कहा कि किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है और कृषि से होने वाली आय में सुधार नहीं होने का संकेत है. यह सरकार की बड़ी चुनौती है. उनका बयान ऐसे वक्त में आया है जब विभिन्न हलकों से किसानों की परेशानी की बात सामने आ रही है और विपक्ष भी केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार को लगातार निशाना बना रहा है. कुमार ने कृषि कर्ज माफी के प्रति आगाह किया और कहा कि अनुभव बताता है कि दीर्घावधि के लिहाज से यह प्रतिगामी (पीछे ले जाने वाला) कदम है. उन्होंने कहा, ‘इसका फायदा उन किसानों तक ही सीमित रहता है जिन्होंने कर्ज ले रखा है. कर्ज नहीं लेने वाले या गैर रैयत किसानों को फायदा नहीं मिलता और इन किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि किसानों को लागत रियायत के जरिए मदद देनी चाहिए. ऐसा करके हम किसानों की कुल लागत घटा सकते हैं और फायदे बढ़ा सकते हैं.’ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कुमार ने कहा कि बहुत सारे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.

नीति आयोग की बैठक में सीएम नीतीश कुमार.

नीति आयोग की बैठक में सीएम नीतीश कुमार.

 

बिहार को विशेष दर्जे की फिर की वकालत
सीएम नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की भी मुखर पैरवी की. नीति आयोग की बैठक में उन्होंने कहा कि विकास के विविध मापदंडों पर राज्य राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है. उन्होंने कहा कि विशेष दर्जा से राज्य का संसाधन बढ़ेगा, बाहरी संसाधनों तक पहुंच बढ़ेगी और निजी निवेश के लिए प्रेरक माहौल बनेगा. उन्होंने कहा, ‘बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त होने से जहां एक ओर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के केन्द्रांश में वृद्धि होगी. वहीं दूसरी ओर विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के अनुरूप केन्द्रीय जीएसटी में अनुमान्य प्रतिपूर्ति मिलने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, कारखाने लगेंगे, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा. उन्होंने कहा, ‘तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो ऐसे निवेश और अन्तरण पद्धति को प्रोत्साहित करे, जिससे पिछड़े राज्यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचाने में मदद मिले. हमारी विशेष राज्य के दर्जे की मांग इसी अवधारणा पर आधारित है.’

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लंबित योजनाओं के लिए मांगी राशि
नीतीश कुमार ने नीति आयोग से आग्रह किया कि पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के माध्यम से विशेष योजना के तहत लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए अवशेष राशि 1651.29 करोड़ रुपए शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि योजनाओं का काम समय पर पूरा किया जा सके. उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए स्वीकृत राशि में से अवशेष 902.08 करोड़ रुपए के मुकाबले पूर्व में भेजे गए दो प्रस्तावों की स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर दी जाए. उन्होंने कहा, ‘पिछले चार वित्त आयोगों की अनुसंशाओं में कुल देय कर राजस्व में बिहार की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है.’ उन्होंने कहा, ’13वें वित्त आयोग ने राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए सहायता अनुदान की सिफारिश की थी, जिस पर 15वें वित्त आयोग को भी विचार करना चाहिए. 14वें वित्त आयोग ने अपनी सिफारिशों में सुझाव दिया था कि यदि सूत्र आधारित अंतरण राज्य विशेष की विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति न कर सकें तो उसे निष्पक्ष ढंग से एवं सुनिश्चित रूप से विशेष सहायता अनुदान से पूरा किया जाना चाहिए. इस सुझाव को लागू नहीं किया गया है.’

(इनपुट – एजेंसियां)