पटना: 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने शराबबंदी कानून में बदलावों को मंजूरी दी है. पटना में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इन बदलावों को मंजूरी दी गई. सरकार विधानसभा के मॉनसून सत्र में इसे पास कराएगी. बिहार विधानमंडल का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है.संशोधन विधेयक में शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए मौजूदा सजा के प्रावधान को कम किया गया है. मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधानसचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने कुल 33 विषयों पर विचार कर उन्हें मंजूरी प्रदान कर दी है.

इन बदलावों को मंजूरी
बिहार प्रदेश कैबिनेट सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि बिहार सरकार की तरफ से विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में शराबबंदी कानून में कुछ संशोधन प्रस्तुत किया जाएगा.’ कानून में किए गए बदलाव के अनुसार शराब मिलने पर सजा को नरम किया गया है. उस नियम को समाप्त कर दिया गया है जिसके तहत जिस मकान में मिलेगा उसे जब्त करने का प्रावधान था. साथ ही परिवार के बाकी सदस्यों की जिम्मेदारी को नरम किया गया है. संशोधन के तहत शराब मिलने पर घर, वाहन और खेत जब्त करने के प्रावधानों में नरमी बरती गई है.

बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी
बिहार में पांच अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे कड़ाई से लागू किए जाने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को सर्वसम्मिति से विधानमंडल से पारित करवाया था पर बाद में इसके कुछ प्रावधानों को कड़ा बताए जाने और इस कानून का दुरुपयोग किए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष द्वारा इसकी आलोचना की जाती रही है. 11 जून को लोकसंवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान शराबबंदी कानून में कुछ तब्दीली से संबंधित प्रश्न के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमलोगों ने राज्य में पूरी ईमानदारी से शराबबंदी कानून को लागू किया है. इसमें कुछ कड़े प्रावधान हैं, इसके लिए कार्यक्रम में एक राय बनाने के लिए ऑल पार्टी मीटिंग की गई थी.

नीतीश ने पहले ही दिए थे संकेत
नीतीश ने कहा था कि शराबबंदी कानून का प्रभावकारी ढंग से पालन हो, इसके किसी अंश का दुरुपयोग न हो. अंततः हमलोगों का लक्ष्य शराबबंदी से आगे बढ़ते हुए नशामुक्त समाज बनाना है. बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने मीडिया के एक वर्ग से बातचीत करते हुए बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में संशोधन विधेयक 2018 के बारे में आज बताया कि पहले शराब के उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता, विक्रेता के लिए दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था, को अब दो स्लैब में किया गया है.