नई दिल्ली: भले ही कर्नाटक में कांग्रेस को कम सीटें मिली हों लेकिन वोट शेयर के मामले में वह बीजेपी से बहुत आगे है. इस चुनाव में कांग्रेस को जहां 38 प्रतिशत वोट मिले वहीं बीजेपी को 36.2 प्रतिशत वोट ही मिल पाए. 2013 के चुनाव से अगर तुलना करें तो कांग्रेस को 1.4 प्रतिशत ज्यादा वोट मिले लेकिन वह इस वोट्स को सीट में नहीं बदल पाई और उसकी 44 सीटें कम हो गईं. इस चुनाव में कांग्रेस को 1,38,24,005 लोगों ने वोट दिया वहीं बीजेपी को 1,31,85,384 लोगों ने वोट दिया. अगर वोट शेयर की बात करें तो 2013 की तुलना में कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले. यानी कह सकते हैं कि सरकार को लेकर राज्य में एंटी इंकंबेंसी नहीं थी लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति के आगे कांग्रेस चित हो गई. Also Read - India Covid-19 Updates: देश में बीते 24 घंटों में 38 हजार नए केस और 480 की मौत, संक्रमितों का आंकड़ा 91 हजार पार

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बीजेपी ने इस तरह वोटर्स को साधा

इस चुनाव में वोटर्स तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने माइक्रो मैनेजमेंट को अपनाया. बीजेपी ने 30 कैबिनेट मंत्रियों समेत 55 सांसदों को 4-4 विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी थी. बीजेपी ने इस चुनाव में हर गांव में जनसंपर्क किया. एक दिन में एक ही गांव में एक घंटे के अंतराल पर जनसंपर्क अभियान चलाया. इस रणनीति ने बीजेपी को मुकाबले में आगे ला दिया.

पन्ना प्रमुख के साथ पन्ना कमेटी

बीजेपी ने कर्नाटक फतह के लिए पहली बार पन्ना प्रमख के साथ पन्ना कमेटी बनाई. हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी ने 15-22 हजार पन्ना प्रमुख की फौज बनाई. इसका फायदा यह हुआ कि वह 10 लाख से ज्यादा मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रही. मिस्ड कॉल से बीजेपी के सदस्य बने लोगों से कॉल सेंटर के जरिए संपर्क किया गया. जिनसे फोन पर बात नहीं पो पाई उनसे सीधा संपर्क किया गया.

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बूथ को तीन हिस्सों में बांटा

बीजेपी ने 50-55 हजार बूथ को तीन हिस्सों में बांटा. बूथ कमेटी, शक्ति केंद्र और महाशक्ति केंद्र. हर बूथ पर 5 से 7 लोगों की कमेटी बनाई. 5 से 7 बूथ को मिला कर एक शक्ति केंद्र और फिर महाशक्ति केंद्र बनाया.

पीएम की रैलियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चुनाव में भी जमकर रैलियां की और अंतिम समय में वोटर्स को बीजेपी के पाले में करने में कामयाब रहे. इस चुनाव में पीएम ने लेट एंट्री की लेकिन कुछ ही दिनों में गेम बदल दिया.