नई दिल्ली: भारत में कैब में महिलाओं के साथ आए दिन छेड़छाड़ और बलात्कार के मामले सामने आने के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऑटोमोबाइल स्टैंडर्ड पैनल ने कैब से चाइल्ड लॉक हटाने का फैसला किया है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री चाइल्ड लॉक की जगह पर नए लैच सिस्टम पर काम कर रहा है. सरकार की ऑटोमोबाइल स्टैंडर्ड मेकिंग पैनल, सीएमवीआर-टीएससी के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया. जुलाई 2019 से कैब में चाइल्ड लॉक के स्थान पर नए लॉक लगाए जाएंगे.Also Read - Rajasthan News: बच्चों को जंजीर से बांधकर पीटा, भूखा भी रखा, मां-बाप गिरफ्तार किये गए

एक ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट जो उस समय मीटिंग में मौजूद थे उन्होंने बताया कि ऐसे लाॅक लगाने का काम डीलर की तरफ से किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि इस दूसरे तरह के लॉक का इस्तेमाल सिर्फ कैब में किया जाएगा. पहले से रजिस्टर्ड गाड़ियों में चाइल्ड लॉक को बदला जाएगा. रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (आरटीओ) को यह सुनिश्चित करना होगा कि कैब में इस तरह के चाइल्ड लॉक नहीं होने चाहिए. Also Read - तो अब अपराध की श्रेणी में नहीं आएगी कम मात्रा में बरामद ड्रग्स? सामाजिक न्याय मंत्रालय ने की ये खास सिफारिश

मीटिंग में मौजूद ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की गई. उन्होंने कहा, ‘बच्चों की सुरक्षा के लिए चाइल्ड लॉक + न होने पर यह आम सहमति बनी कि बच्चों के साथ निश्चित तौर पर कोई बालिग सदस्य कैब में होगा. सूत्रों ने यह भी बताया कि सभी कर्मशल गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट साल में एक बार लेना होता है, तो आरटीओ के पास चाइल्ड लॉक हटाने का मौका होगा. आरटीओ चाइल्ड लॉक वाले कैब को आसानी से सर्टिफिकेट देने से इनकार कर सकते हैं. Also Read - यूपी: रेप केस में जेल में बंद आसाराम की पूजा करने वालों पर मुकदमा, BJP नेता ने की थी शिकायत