नई दिल्ली: लोकसभा में राजग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी है. प्रस्ताव पर बहस शुरू होने से पहले ही राजग गठबंधन को झटका लगा जब शिवसेना ने इसमें भाग नहीं लेने की घोषणा की. प्रस्ताव पर बहस शुरू होते ही बीजू जनता दल ने सदन से वाकआउट किया. लोकसभा में शिवसेना के 18 और बीजद के 19 सदस्य हैं. वोटिंग की प्रक्रिया से इन दोनों पार्टियों के बाहर होने के बाद सदन में बहुमत का आंकड़ा भी बदल गया है. हालांकि, सरकार के लिए चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि सदन में भाजपा के सदस्यों की संख्या ही बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से ज्यादा है. Also Read - West Bengal: PM मोदी के पहुंचने से पहले बवाल, हावड़ा में BJP कार्यर्ताओं पर हमला, TMC वर्कर्स पर आरोप

ऐसे बदला बहुमत का आंकड़ा
545 सदस्यों वाली लोकसभा में फिलहाल 11 सीटें रिक्त हैं. बाकी बचे 534 सदस्यों में से 315 का समर्थन राजग सरकार के साथ है. विपक्षी गठबंधन यूपीए के 63 सांसद हैं. शिवसेना और बीजद के वोटिंग से बाहर होने के बाद लोकसभा के 497 सदस्य ही मतदान करेंगे. सरकार को बहुमत के लिए 249 वोटों की जरूरत होगी. Also Read - सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती: गृह मंत्री अमित शाह ने नेताजी को दी श्रद्धांजलि, कही ये बात

कौन किसके साथ
राजग के 315 सदस्यों में से 274 बीजेपी के हैं. शिवसेना के 18, लोक जनशक्ति पार्टी के 6, शिरोमणि अकाली दल के 4, रालोसपा के 3 और अन्य छोटी पार्टियों के 10 सांसदों का भी समर्थन उसे हासिल है. वहीं, यूपीए में 48 कांग्रेस, 7 एनसीपी, 4 आरजेडी, 2 आईयूएमएल और 2 झारखंड मुक्ति मोर्चा के हैं. Also Read - Congress President Election: कांग्रेस ने कहा- जून में उसका नया निर्वाचित अध्यक्ष होगा

क्षेत्रीय दलों पर टिकी निगाहें
राजग और यूपीए गठबंधन से अलग लोकसभा में कई क्षेत्रीय पार्टियां भी हैं, जो दोनों में से किसी के साथ नहीं हैं. क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे ज्यादा सदस्य अन्नाद्रमुक के हैं. इसके लोकसभा में 37 सदस्य हैं. तृणमूल कांग्रेस के 34, टीडीपी के 16, टीआरएस के 11, सीपीएम के 9, समाजवादी पार्टी के 7, आप के 4, वायएसआर कांग्रेस के 4, एआईयूडीएफ के 3 और 12 दूसरी छोटी पार्टियों के हैं.