जम्मूः जम्मू-कश्मीर में रविवार को एक पुलिसकर्मी की हत्या की जिम्मेदारी आईएस  ने ली थी. इस बीच जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस पी वैद्य ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर में आईएस की मौजूदगी के कोई संकेत नहीं दिख रहे, लेकिन उससे प्रेरित किसी इकलौते आतंकवादी (लोन वूल्फ) की ओर से हमले को अंजाम देने की आशंका है. इसे चिंता का विषय बताते हुए डीजीपी ने कहा कि आतंकवादी संगठन के दावे की जांच करनी होगी. Also Read - Maharashtra Police में 20,000 वैकेंसी, जल्‍द शुरू होगी भर्ती प्रक्र‍िया

आईएस की प्रचार शाखाएं ‘अमक’ और ‘अल-करार’ ने दावा किया था कि श्रीनगर में कांस्टेबल फारूक अहमद की हत्या के लिए आतंकवादी संगठन जिम्मेदार है. उन्होंने चेताया था कि एक युद्ध अभी शुरू हुआ है. अहमद की हत्या के बाद हमलावर उनकी सर्विस राइफल लेकर फरार हो गए थे. वैद्य ने बताया कि आईएस ने अपनी वेबसाइट अल-करार पर दावा किया है कि वे यहां (कश्मीर में) हैं. जमीनी स्तर पर इसके सत्यापन की जरूरत है. यह चिंता की बात है. डीजीपी ने कहा कि पुलिस छानबीन कर दावे का सत्यापन करेगी. Also Read - Kashmir Railway Line: कश्मीर में 2022 तक चलने लगेगी ट्रेन, मोदी सरकार चेनाब नदी पर बना रही दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल

नवंबर में भी किया था दावा
वैद्य ने कहा कि उन्होंने न सिर्फ पुलिसकर्मी की हत्या का दावा किया है बल्कि हथियार भी दिखाए हैं. उन्होंने कहा कि आईएस ने पिछले साल नवंबर में भी दावा किया था. जमीनी स्तर पर इसके सत्यापन की जरूरत है. इसमें (संदेह का) तत्व है. पुलिस प्रमुख ने कहा कि अब तक जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं दिख रहा जिससे लगे कि कश्मीर में आईएस की कोई बड़ी मौजूदगी है. Also Read - कश्मीर: बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं रुका पाकिस्तानी घुसपैठिया, भारतीय जवानों ने सिखाया सबक, और...

लोन वूल्फ पर हमले का शक
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर भले ही कोई संकेत नहीं दिख रहे हों, लेकिन इकलौते आतंकवादी (लोन वूल्फ) की ओर से हमले को अंजाम दिया जा सकता है. (इसकी मौजूदगी की) संभावना है. वैद्य ने कहा कि हो सकता है कुछ लोग सोशल मीडिया पर आईएसआईएस के प्रचार से प्रभावित हो गए हों, जैसे जाकिर मूसा अल-कायदा की तरफ आकर्षित हो गया था. पहले भी आईएस घाटी में हुए हमलों में अपना हाथ होने का दावा करता रहा है. घाटी में कभी-कभी, खासकर आतंकवादियों के जनाजे में, आईएस के झंडे नजर आते रहे हैं.

लोग यहां दूसरा सीरिया नहीं बनने देंगे
अतीत में सुरक्षा एजेंसियां घाटी में आईएस की मौजूदगी के दावे को खारिज करती रही हैं. पुलिस भी ऐसे दावों को खारिज करती रही है और ऐसे दावों को उनका दुष्प्रचार करार देती रही है. डीजीपी वैद्य ने कहा कि अब तक जमीनी स्तर पर आईएस की ठोस मौजूदगी नहीं दिखी है और उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग सतर्क रहेंगे ताकि यह दूसरा सीरिया नहीं बनने पाए.