कोलकाता : केरल में निपाह वायरस के संक्रमण के चलते अब तक 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. हलांकि इस वायरस से संक्रमण के नए मामले सामने नहीं आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि निपाह वायरस पर नियंत्रण पा लिया गया है. उन्होंने कहा अब केरल से भागने की जरूरत नहीं है. गौरतलब है कि केरल राज्य में ही इस वायरस का संक्रमण फैला था. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि केरल में विषाणु के कारण भले ही 17 लोगों की मौत की खबर है लेकिन संक्रमण के नये मामले सामने नहीं आए हैं. Also Read - युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत: एमएस धोनी

क्या है निपाह वायरस
अश्विनी चौबे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, ‘देश में कहीं से भी निपाह की खबर नहीं है. विषाणु पर नियंत्रण पा लिया गया है. यह अच्छा संकेत है. निपाह संक्रामक बीमारी नहीं है. किसी को भयभीत होने की जरूरत नहीं है. ’सबसे पहले मलेशिया में इस वायरस की पुष्टि हुई थी. भारत के लिए निपाह वायरस एक नई चुनौती  के रूप में उभरा. अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके मुताबिक, इसका नाम निपाह मलेशिया के एक गांव ‘सुनगई निपाह’ के नाम पर पड़ा जहां 1998 में पहली बार इस रोग की पहचान हुई थी. सूअरों में फैले इसके संक्रमण की वजह से उस इलाके में एक साल के भीतर 100 लोगों की मौत हो गई थी. तकरीबन 300 लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए थे. उस समय मलेशिया में इस बीमारी को रोकने के लिए लाखों सूअरों को मार दिया गया था. इस बीमारी पर की गई रिसर्च में ये पता चला कि इसका संक्रमण इंसानों के अलावा फल खाने वाले चमगादड़, सूअर, गाय और अन्य जानवरों से भी फैलता है. संक्रमति फल खाने से भी इसका विस्तार होता है. Also Read - UGC NET Exam 2020: परीक्षा शेड्यूल को लेकर TMC सांसद ने केंद्र पर बोला हमला, कहा- कुछ डेट्स राज्य के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा से खाती है मेल 

निपाह वायरस के कारण होने वाली मृत्यु दर 70 फीसद
निपाह विषाणु से संक्रमित व्यक्ति के दिमाग में इन्सेफलाइटिस जैसी तेज सूजन आ जाती है. अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं बचाव केंद्र के अनुसार संक्रमण के तीसरे दिन से नजर आने शुरू होते हैं और जल्द ही व्यक्ति की मौत भी हो सकती है. शरुआती लक्षणों में बुखार, उल्टी और तेज सिरदर्द की शिकायत होती है. संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने की दिक्कत होती है. शुरुआती लक्षणों के बाद मरीज का दिमागी संतुलन बिगड़ने लगता है और उसकी चेतना में गिरावट आने लगती है, फिर कोमा में चला जाता है और उसकी मौत तक हो जाती है. निपाह वायरस के कारण होने वाली मृत्यु दर 70 फीसद है. Also Read - Parlor Precaution During Corona Virus: कोरोना के दौरान जा रही हैं पार्लर तो इन बातों का रखें ध्यान, खतरा होगा कम

मंत्री कई स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा राज्य मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने कोलकाता महानगर पहुंचे थे. विषाणु के हमले के भय के चलते कई लोगों के केरल से लौटने की खबर के बारे में जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, केरल के जिस क्षेत्र विशेष से विषाणु फैलने की खबर थी. वहां हमारी पूरी टीम तैनात है. विषाणु पर केरल में भी नियंत्रण पा लिया गया है जहां 17 लोगों की मौत हुई. कहीं से भी भागने की जरूरत नहीं है. ’’ पश्चिम बंगाल में निपाह विषाणु से किसी की मौत नहीं हुई. हालांकि केरल सरकार ने लोगों से एहतियात के तौर पर कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड और कन्नूर जिलों का दौरा करने से बचने की सलाह दी है.