नई दिल्ली. इस साल दुनिया के किसी भी देश के साहित्यकार को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिलेगा. नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति स्वीडिश अकादमी ने यह निर्णय लिया है. अकादमी ने कहा है कि 2019 में नोबेल पुरस्कार की घोषणा के समय ही 2018 के नोबेल विजेता की भी घोषणा की जाएगी. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 70 साल में ऐसा पहली बार होगा कि साहित्य के क्षेत्र में किसी को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा. अकादमी ने अपने बयान में कहा है कि वर्तमान स्थिति में अकादमी के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए इस तरह का निर्णय लेना पड़ा है. दरअसल, स्वीडिश अकादमी की एक पूर्व सदस्य के पति पर महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लगने के बाद अकादमी ने यह कदम उठाया है.

पूर्व सदस्य के पति पर 18 महिलाओं ने लगाया था आरोप
नोबेल अकादमी की पूर्व सदस्य कैटरीना फ्रॉस्टेंसन के पति फ्रांसीसी फोटोग्राफर जीन क्लॉड अर्नाल्ट पर 18 महिलाओं ने पिछले साल नवंबर में #मीटू कैंपेन के तहत यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था. पिछले दिनों एक स्वीडिश अखबार ने तीन चश्मदीद गवाहों के हवाले से यह खबर छापी थी कि अर्नाल्ट ने नोबेल अकादमी के एक कार्यक्रम के दौरान राजकुमारी विक्टोरिया को पकड़ लिया था. हालांकि शाही परिवार ने इस घटना को लेकर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की थी. और न ही #मीटू कैंपेन को ही समर्थन दिया था. अर्नाल्ट पर यह भी आरोप लगा था कि उसने नोबेल विजेताओं के नाम लीक किए थे. हालांकि अर्नाल्ट ने अपने ऊपर लगे यौन दुर्व्यवहार और नोबेल विजेता का नाम लीक करने के आरोपों से इनकार कर दिया था.

नोबेल अकादमी ने तोड़ लिए थे फ्रॉस्टेंसन से संबंध
इस तरह के मामले सामने आने के बाद नोबेल अकादमी के सदस्यों ने कैटरीना फ्रॉस्टेंसन को अकादमी में दी गई भूमिकाओं की खिलाफत की थी. अकादमी की 18 सदस्यों वाली कमेटी की अध्यक्ष प्रो. सारा डेनियस ने भी फ्रॉस्टेंसन के खिलाफ वोट किया था. इसके बाद नोबेल अकादमी ने फ्रॉस्टेंसन के फोरम से अपने संबंध तोड़ लिए. हालांकि अकादमी के नियमों की वजह से उन्हें इसकी सदस्यता से नहीं हटाया जा सका. आपको बता दें कि तकनीकी रूप से अकादमी में एक बार सदस्य बन जाने के बाद कोई इस्तीफा नहीं दे सकता, क्योंकि उसे ताउम्र के लिए सदस्य मनोनीत कर लिया जाता है. अलबत्ता ऐसे सदस्य अकादमी की गतिविधियों से खुद को अलग रख सकते हैं.

70 साल में पहली बार नहीं दिया जाएगा पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार के इतिहास में ऐसा 70 साल बाद होगा कि साहित्य के क्षेत्र में किसी को विश्व का यह सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार नहीं दिया जाएगा. इससे पहले दूसरे विश्वयुद्ध के समय 1940 और 1943 में अकादमी इस पुरस्कार का वितरण नहीं कर पाई थी. अमेरिकी उपन्यासकार विलियम फॉकनर को 1950 में यह पुरस्कार दिया गया था. इसके अलावा नोबेल अकादमी के पास यह अधिकार है कि वह खास मौकों पर पुरस्कार न देने का निर्णय ले सकती है. 1786 में स्थापित इस अकादमी ने इससे पहले 7 बार- 1915, 1919, 1925, 1926, 1927, 1936 और 1949 में साहित्य के क्षेत्र में किसी उल्लेखनीय कृति के न मिलने पर नोबेल पुरस्कार नहीं देने का निर्णय लिया है.#AIBKnockout,