नई दिल्लीः राजनीति के जानकारों के बीच कहा जाता है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है. यह बात ठीक भी है. राज्य में लोकसभा की 80 सीटें हैं. इस राज्य में दबदबा वाला नेता ही राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की भूमिका में उभरता है. लेकिन हाल के राजनीतिक डेवलपमेंट्स कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए शुभ साबित होती नहीं दिख रही हैं. ये डेवलपमेंट्स अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को निराश करने वाले साबित हो सकते हैं.

दरअसल, यूपी में अपने दम पर कांग्रेस कोई प्रभाव छोड़ती नहीं दिख रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. उसके लिए उम्मीद की किरण सपा, बसपा और रालोद के संभावित महगठबंधन में जगह पाने में ही दिखती है, लेकिन लगता है कि अखिलेश के नेतृत्व में सपा की योजना कुछ अलग दिख रही है. वो आगामी चुनाव को मोदी विरोध या भाजपा विरोध के नेता के रूप में राहुल गांधी को नहीं उभरना देना चाहते हैं. इसके पीछे दो कारण हैं.

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मोदी बनाम राहुल नहीं होने देना चाहते चुनाव
पहला, यूपी के क्षत्रप माने जाने वाले अखिलेश और मायावती को यह बात अच्छी तरह से पता है कि अगर वे एकजुट हो गए तो आसानी से भाजपा को हरा सकते हैं. इसका नमूना गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा चुनावों में देखने को मिल चुका है. दूसरा, राजनीतिक दल किसी भी स्थिति में 2019 का चुनाव मोदी बनाम राहुल गांधी नहीं होने देना चाहते. समाजवादी पार्टी भी संभवतः इसी लाइन पर सोच रही है. यह सबको पता है कि यूपी में अमेठी और रायबरेली के बाहर कांग्रेस का कोई खास जनाधार नहीं है. ऐसे में सपा-बसपा देश की सबसे पुरानी राजनीतिक दल को गठबंधन में कोई खास स्थान नहीं देना चाहती. हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश ने संकेत दिया था कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती के नेतृत्व को स्वीकार करने को तैयार हैं. उनको पता है कि बसपा को सीटें देने का चुनावी फायदा मिलेगा लेकिन वह कांग्रेस के लिए अधिक सीटें छोड़कर टिकट के दावेदार अपने नेताओं को नाराज नहीं करना चाहेंगे.

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कांग्रेस को केवल दो सीटें देने की चर्चा
ऐसी रिपोर्ट्स आ रही है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को दो से अधिक सीटें नहीं देना चाहते. अगर ऐसा होता है तो यह राहुल गांधी के लिए यह काफी अपमानजनक स्थिति होगी. सपा नेताओं का मानना है कि बसपा के गठबंधन से पार्टी को ज्यादा फायदा होगा. रिपोर्टस ऐसी भी आ रही हैं कि अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कोई भी अहम भूमिका देने के खिलाफ हैं. पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में सपा, कांग्रेस से दूरी बनाकर चलती दिख रही है. सपा ने कहा है कि वह उत्तराखंड की सभी पांच लोकसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी.

लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा हुआ है, लेकिन सपा ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन को लेकर कोई चर्चा शुरू नहीं की है. मंगलवार को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर में सपा के एक एमएलसी ने दावा किया है कि संभावित महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका पर कोई चर्चा नहीं हुई है. अखिलेश के एक करीबी ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स से कहा था कि सपा और बसपा एक साथ रहते हैं तो राज्य में किसी तीसरे की जरूरत नहीं पड़ेगी.