नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाने की घोषणा करने और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन आंवटित करने के बाद प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बुधवार को कहा कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद कयामत तक मस्जिद ही रहेगी और किसी के पास भी मस्जिद के बदले दूसरी जगह जमीन लेने का हक नहीं है. Also Read - राम जन्मभूमि अयोध्या में रामायण युग से जुड़े पांच तालाबों का होगा कायाकल्प, ये है सरकार की योजना

जमीयत प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ”बाबरी मस्जिद, कानून और इंसाफ की नज़र में एक मस्जिद थी और शरिया के मद्देनज़र आज भी यह एक मस्जिद ही है और कयामत तक मस्जिद ही रहेगी, भले ही इसे कोई भी रूप या नाम दे दिया जाए.” Also Read - Ayodhya Ram Temple: मंदिर निर्माण में सीता एलिया के पत्थर का इस्तेमाल, जानें इसकी पौराणिक महत्व को

मौलाना मदनी ने कहा, ”किसी भी शख्स या पक्ष के पास मस्जिद पर से दावा वापस लेने और उसकी जगह दूसरी जमीन लेने का हक और अख्तियार नहीं है.” उन्होंने कहा कि कोई भी शख्स या संगठन मस्जिद के बदले में कहीं और जमीन नहीं ले सकता है. ऐसा करने का उसके पास अधिकार नहीं है. मस्जिद वक्फ होती है, जिसका मालिक अल्लाह होता है. Also Read - Arvind Kejriwal बोले- मैं हनुमान जी का भक्‍त हूं, बुजुर्गों को अयोध्‍या में भगवान राम के फ्री दर्शन करवाएंगे

गौरतलब है कि एक सदी से भी पुराने बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि मामले का उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ नवंबर को निपटारा कर दिया था और विवादित भूमि राम मंदिर के लिए रामलला विराजमान को दे दी थी, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ भूमि दिए जाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगाई.