नई दिल्ली: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से दो दिन पहले, नई दिल्ली ने बुधवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और शी के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर हुई बातचीत की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.’ चीनी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आ रहे हैं.

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में जहां दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शी और खान के बीच बातचीत की रिपोर्ट पर बुधवार को कहा कि हमने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच बैठक के संबंध में रिपोर्ट देखी, जिसमें उन्होंने अपनी बातचीत के दौरान कश्मीर का भी उल्लेख किया है. कुमार ने कहा कि भारत का पक्ष अटल बना हुआ है और स्पष्ट है कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है. चीन हमारे पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है. भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.

भारत ने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक और संप्रभु मामला है और भारतीय संविधान से जुड़ा हुआ है. किसी भी अन्य देश को इससे कुछ लेना-देना नहीं है. सूत्रों के अनुसार, महाबलीपुरम में 11-12 अक्टूबर को होने वाले शी-मोदी की बातचीत में कश्मीर और अनुच्छेद 370 का मामला शामिल नहीं है और अगर शी मामले में और ज्यादा जानना चाहेंगे तो उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी. खान और शी के बीच वार्ता के बाद बुधवार को जारी संयुक्त बयान में एक पूरा पैरा कश्मीर मुद्दे को लेकर था.

बयान के अनुसार, पाकिस्तानी पक्ष ने चीनी पक्ष को जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया, जिसमें उसकी चिंताओं और मौजूदा मुद्दे शामिल हैं. चीनी पक्ष ने इसपर कहा कि वह जम्मू एवं कश्मीर के मौजूदा हालात पर ध्यान दे रहा है और दोहराते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दा इतिहास द्वारा पैदा किया गया विवाद है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव और द्विपक्षीय समझौते से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के आधार पर शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए. बयान के अनुसार, “चीन किसी भी एकतरफा कार्रवाई की निंदा करता है, जिससे स्थिति जटिल हो सकती है. दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि एक शांत, सहयोगी और समृद्ध दक्षिण एशिया सभी पक्षों के हित में है. पक्षों को वार्ता और आपसी सम्मान के अधार पर वार्ता के जरिए मामले को सुलझाना चाहिए.

चीन ने यूएनजीए में कश्मीर मुद्दे पर और इससे पहले सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान का जोरदार समर्थन किया था, जबकि मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री गेंग शुआंग ने थोड़ी नरमी दिखाते हुए कहा, “चीन भारत और पाकिस्तान से वार्ता करने और कश्मीर समेत सभी मुद्दों पर संपर्क करने और साझा विश्वास मजबूत करने का आह्वान करता है. यह दोनों देशों और दुनिया की साझा आकांक्षाओं के हित में होगा. वहीं इमरान खान ने बुधवार को अपनी वार्ता के दौरान बीजिंग में ‘शी और उनकी सरकार को कश्मीर मुद्दे पर उसके सिद्धांतों के साथ खड़े होने के लिए शुक्रिया अदा किया.