नोटबंदी के बाद अब केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी बैंक में 500 और हजार के पुराने नोट अपने खाते में जमा करवाता है तो उसपर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन पैसा जमा करवाने के दौरान सरकार ने एक नियम यह भी रखा है कि इसमें यह देखा जायेगा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला व्यक्तिगत चंदा 20,000 रुपये से कम होना चाहिये और यह दस्तावेजों में दर्ज होना चाहिये।

आपको बता दें कि इनकम टैक्स कानून के तहत पहले से ही यह छूट पोलिटिकल पार्टियों को मिली हुई है। इस मामले की जानकारी देते हुए राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा है कि सरकार राजनीतिक दलों को प्राप्त कर छूट में कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है। लेकिन अगर कोई राजनीतिक दल 500 और 1,000 रुपये के नोट अपने खातों में जमा कराने के लिये मुक्त हैं। यह भी पढ़े: पीएम नरेंद्र मोदी पर बरसे राहुल गांधी, नोटबंदी को बताया ड्रामा

वहीं इस मामले पर सूत्रों की माने तो 8 नवंबर को सरकार ने जैसे नोटबंदी की घोषणा की उसके बाद से आम जनता तो कैश की कमी के कारण दिक्कतों को झेल रहा है वहीं इसका तोड़ निकालते हुए अब अधिकांश तर राजनीतिक दल कैश ही चंदा ले रहे हैं। आपको बता दें कि अधिकांश राजनीतिक दल सूचना अधिकार के दायरे में आने को तैयार नहीं हैं उसके साथ ही न ही नगद चंदे का स्त्रोत बताने को तैयार हैं। फिलहाल सरकार के इस फैसले का पर अब तमाम राजनितिक दल क्या जवाब देंगी यह तो कल पता चल ही जाएगा। लेकिन इस नोटबंदी के बाद से देश में केंद्र की सरकार पर जमकर हमला हो रही और ऐसे इस तरह का फैसला लेना कितना कारगर साबित होगा यह वक्त ही बताएगा।