नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का तीसरा सप्ताह भी अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे की भेंट चढ़ गया और दोनों सदनों की बैठक शुक्रवार को लगातार 15वें दिन भी बाधित रही. इस वजह से राज्यसभा को सोमवार तक के लिए और लोकसभा को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया. लोकसभा में सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव को हंगामे के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सका. हंगामे के कारण दोनों सदनों में आज भी प्रश्नकाल एवं शून्यकाल नहीं हो सके. हालांकि, गुरुवार शाम को सरकार ने गतिरोध खत्म करने के लिए मंत्री विजय गोयल को विपक्षी नेताओं से मिलने की जिम्मेदारी दी थी. वे मिले भी, लेकिन इसका कोई असर संसद में नहीं दिखा. Also Read - पूर्व CJI रंजन गोगोई बने सांसद, राज्यसभा में शपथ के बीच विपक्षी सांसदों का हंगामा

सुबह, लोकसभा की बैठक शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया. तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के सदस्य अपने प्रदेश में आरक्षण से जुड़ा मुद्दा उठाने का प्रयास कर रहे थे, वहीं अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. कांग्रेस सदस्य दलितों के मुद्दे पर अपनी मांग उठा रहे थे हालांकि शोर के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी. Also Read - दिल्ली हिंसा पर आज लोकसभा में होगी चर्चा, अमित शाह देंगे जवाब

तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्यों को अपने स्थानों पर ही तख्तियां लेकर खड़े देखा गया. वे आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग कर रहे हैं. राजद से निष्कासित राजेश रंजन ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने का मुद्दा उठाया. हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिये स्थगित कर दी गई. Also Read - आम आदमी पार्टी और TMC ने राज्यसभा में दिया नोटिस, दिल्ली हिंसा पर चर्चा कराने की मांग

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की बैठक पुन: शुरू हुई तो टीआरएस के सदस्य एक राष्ट्र एक नीति की अपनी मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के पास आ गये, वहीं अन्नाद्रमुक के सदस्य आगे आकर कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे. उधर तेदेपा और वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर खड़े थे. हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालयों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के संबंध में सिफारिशें देने के लिए प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई में एक समिति के गठन की घोषणा की. उन्होंने राम नवमी के उपलक्ष्य में सोमवार को सदन में अवकाश की भी घोषणा की.

लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में व्यवस्था बनाने की अपील की. उन्होंने सदन में व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए आज लगातार छठे दिन तेलुगू देशम पार्टी के टी नरसिंहन और वाईएसआर कांग्रेस के वाई बी सुब्बारेड्डी द्वारा सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई. दोनों दल गत शुक्रवार से अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने सदन की बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया.

उधर, राज्यसभा की बैठक शुरू होते ही अन्नाद्रमुक, द्रमुक, तेदेपा और कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आ गए तथा हंगामा शुरू कर दिया. अन्नाद्रमुक और द्रमुक के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे. तेदेपा सदस्य और कांग्रेस के केवीपी रामचंद्र राव आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे. कांग्रेस के सदस्य अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के संबंध में चर्चा की मांग कर रहे थे. सपा, तृणमूल कांग्रेस, बीजद और राकांपा सदस्य अपने स्थानों पर खड़े थे.

सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील करते हुए सदस्यों से कहा कि तीन सप्ताह से लगातार हंगामे की वजह से सदन में कोई कामकाज नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि आसन हर मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देना चाहता है, इसके बावजूद हंगामे का औचित्य समझ से परे है.

हंगामे पर अफसोस जाहिर करते हुए नायडू ने कहा कि तीन सप्ताह से लगातार हंगामे की वजह से सदन का नहीं चल पाना निराशाजनक है. देश के लोग भी निराश हो गए हैं. विपक्षी कांग्रेस और सपा के सदस्यों ने गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह विपक्षी दलों से बात ही नहीं कर रही है. नायडू ने कहा कि लोग सवाल करते हैं कि जब सदन ही नहीं चल रहा है तो कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए क्यों नहीं स्थगित की जा रही है. लेकिन ऐसा करना उनके हाथ में नहीं है. सदन में हंगामा थमते नहीं देख नायडू ने 11 बज कर करीब 15 मिनट पर बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया.

इसके पहले सुबह दोनों सदनों में अमर स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की 87वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.