कोलकाता: नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी की मां निर्मला बनर्जी ने सोमवार को कहा कि यह उनके लिए गौरव का क्षण है और वह अपने बेटे की उपलब्धि पर बहुत खुश हैं. निर्मला ने कहा कि वह इस बात से भी खुश हैं कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की संयुक्त विजेता उनकी पुत्रवधू एस्थर डुफ्लो हैं. Also Read - Coronavirus Outbreak: कोरोना संकट से निपटने में ममता बनर्जी की सहायता करेंगे नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं और उनकी उपलब्धियों पर गौरवान्वित हूं. मैंने अभी उनसे बात नहीं की है. मुझे लगता है कि अमेरिका में इस समय रात है तो वह सो रहे होंगे.’’ निर्मला बनर्जी ने कहा, ‘वह हमेशा होनहार और अनुशासित छात्र रहे.’’ अपनी 47 वर्षीय पुत्रवधू के बारे में निर्मला ने कहा, वह युवा और होशियार हैं. Also Read - नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने कहा- प्रभावी शासन के लिए मजबूत विपक्ष का होना है महत्वपूर्ण

भारतीय-अमेरिकी बनर्जी, उनकी फ्रांसीसी-अमेरिकी पत्नी डुफ्लो और अमेरिका के अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर को सोमवार को संयुक्त रूप से 2019 के लिये अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित किया गया. Also Read - पीएम की 'ये मीडिया आपको एंटी मोदी बताती है' वाली बात पर नोबेल विनर अभिजीत बनर्जी बोले- वो सबको देख रहे हैं

निर्मला बनर्जी स्वयं सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेस में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रही हैं और उनके पति दीपक बनर्जी तत्कालीन प्रेसीडेंसी कॉलेज (विश्वविद्यालय) में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख और प्रोफेसर थे.

 डुफ्लो पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की अर्थशास्त्री
अभिजीत बनर्जी और उनकी फ्रांसीसी-अमेरिकी पत्नी डुफ्लो प्रतिष्ठित मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में काम करते हैं. डुफ्लो अर्थशास्त्र का नोबल पाने वाली दूसरी महिला हैं. वहीं वह यह पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की अर्थशास्त्री भी है.

अभिजीत ने कलकत्ता विश्वविद्यालय और जेएनयू से की है पढ़ाई
58 वर्षीय बनर्जी ने भारत में कलकत्ता विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई की. इसके बाद 1988 में उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की.

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में हैं प्रोफेसर
एमआईटी की वेबसाइट के अनुसार वर्तमान में अभिजीत बनर्जी मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन अंतरराष्ट्रीय प्रोफेसर हैं.

जे-पाल की 2003 में की स्‍थापना
बनर्जी ने वर्ष 2003 में डुफ्लो और सेंडिल मुल्लाइनाथन के साथ मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी एक्शन लैब (जे-पाल) की स्थापना की. वह प्रयोगशाला के निदेशकों में से एक हैं.

यूएन में इस पद पर भी रहे
बनर्जी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ‘2015 के बाद के विकासत्मक एजेंडा पर विद्वान व्यक्तियों की उच्च स्तरीय समिति’ के सदस्य भी रह चुके हैं.

डुफ्लो जे-पाल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक हैं
अभिजीत बनर्जी की पत्‍नी डुफ्लो का जन्म 1972 में हुआ. वह जे-पाल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक हैं. वह एमआईटी के अर्थशास्त्र विभाग में गरीबी उन्मूलन और विकास अर्थशास्त्र की अब्दुल लतीफ जमील प्रोफेसर हैं.