नई दिल्ली. भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक और साहित्य के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार विजेता वी.एस. नायपॉल (V.S. Naipaul) का रविवार की तड़के निधन हो गया है. लंदन स्थित अपने घर में 85 वर्षीय नायपॉल ने आखिरी सांसें लीं. वी.एस. नायपॉल का पूरा नाम विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल था. उनका जन्म 17 अगस्त 1932 को ट्रिनिडाड के चगवानस में हुआ था. त्रिनिडाड में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद नायपॉल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. उन्होंने उच्च शिक्षा इसी यूनिवर्सिटी से पूरी की थी. लेखन के लिए दुनियाभर में जाने गए वी.एस. नायपॉल ने भारत के ऊपर भी कई किताबें लिखी हैं. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘ए बेंड इन द रिवर’ और ‘ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास’ शामिल हैं. कथा और कथेतर विधा में नायपॉल की 25 से अधिक किताबें प्रकाशित हैं.

1957 में छपी थी पहली किताब
उपनिवेशवाद और इससे जुड़े विषयों पर किताबें लिखने के लिए पहचाने जाने वाले वी.एस. नायपॉल की पहली किताब ‘द मिस्टिक मैसर’ (The Mystic Masseur) वर्ष 1957 में प्रकाशित हुई थी. एक बार लेखन की दुनिया में आने के बाद नायपॉल, सदा के लिए साहित्य-सेवा में ही जुट गए. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नायपॉल के निधन के बाद उनकी पत्नी ने कहा, ‘उन्होंने रचनात्मकता और उद्यम से भरी जिंदगी जी. आखिरी वक्त में वो तमाम लोग जिन्हें वो प्यार करते थे, वो साथ थे.’

लेखन के लिए मिला नाइटहुड और नोबेल
साहित्य जगत में अपनी अप्रतिम छाप छोड़ने के लिए वी.एस. नायपॉल को वर्ष 1990 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया. इसके बाद वर्ष 1993 में उन्हें डेविड कोहेन ब्रिटिश लिटरेचर प्राइज से नवाजा गया. डेविड कोहेन पुरस्कार समकालीन ब्रिटिश लेखक को लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए दिया जाता है. वर्ष 2001 में नायपॉल को साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वी.एस नायपॉल के पूर्वज भारत के निवासी थे. वर्षों पहले वे त्रिनिदाद में जाकर बस गए थे. नायपॉल ने बाद के दिनों में अपने पूर्वजों के देश के ऊपर भी किताब ‘एन एरिया ऑफ डार्कनेस’ लिखी.