
Brijnandan Dubey
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कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने बेलगावी गांव की एक 42 वर्षीय महिला के साथ दरिंदगी पर नाराजगी जताई. दरअसल, महिला का बेटा दूसरी लड़की के साथ भाग गया. जबकि उस लड़की की शादी दूसरे के साथ तय थी. जिसके बाद महिला को गांव के एक खंभे में बांध दिया गया. इसके बाद सार्वजनिक रूप से महिला को निर्वस्त्र करके पिटाई की गई. चीफ जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी.
बेंच ने पूछा- पुलिस पीड़ित महिला की सहायता के लिए तत्पर क्यों नहीं थी और ऐसी घटना को कैसे होने दिया जा सकता था?
चीफ जस्टिस ने कहा,
“मेरे पास शब्द नहीं हैं! उस महिला को कितना सदमा झेलना पड़ा होगा. दो घंटे तक उसे उसके घर से घसीटा गया, उसके कपड़े उतार दिए गए, जानवरों की तरह पीटा गया. सुबह 3.30 बजे पुलिस पहुंची, 1 बजे उसे बाहर निकाला गया उसके घर से घसीटा गया. क्या वे (हमलावर) इंसान हैं? जानवरों में भी कुछ समझ होती है. क्या इंसान इसी तरह व्यवहार करते हैं? दो घंटे तक उसे जानवरों ने पीटा. मुझे उन्हें इंसान कहने में शर्म आती है. कोई कैसे हो सकता है इतना क्रूर, इतना अमानवीय? हम जानते हैं कि राज्य चीजों को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन इसे देखो!”
अदालत ने पुलिस से पूछा, “ऐसा कैसे होने दिया गया? कोई पुलिसिंग क्यों नहीं की गई? पुलिस का काम केवल जांच करना नहीं है, बल्कि लोगों की रक्षा करना भी उनका काम है.”
कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस को ऐसी घटनाओं के प्रति सतर्क रहना चाहिए. एक जोड़े के भागने की खबर एक छोटे से गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई होगी और बेलगावी जिले की पुलिस ने ग्रामीणों को किसी भी अप्रिय प्रतिक्रिया के खिलाफ चेतावनी देने के लिए कदम उठाया होगा.
मिली जानकारी के मुताबिक, एक ग्रामीण द्वारा अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद पुलिस अधिकारी महिला को बचाने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे.
हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर को घटना का स्वत: संज्ञान लिया.
जज ने क्या-क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा- 11 दिसंबर की ये घटना गहरी जड़ें जमा चुके पुरुष प्रधानवाद को दिखाता है. केवल इसलिए कि वे पुरुष हैं, वे एक महिला के साथ क्रूर व्यवहार कर सकते हैं? क्या केवल इसलिए कि वो एक पुरुष है, उन्हें ऐसा करने का लाइसेंस मिल जाता है?
जज ने आगे कहा कि गांव की अन्य महिलाएं क्या महसूस करेंगी? किसी भी समझदार महिला को डर लगेगा. वो इस देश से नफरत करना शुरू कर देगी. ऐसा महाभारत में भी नहीं हुआ था जब द्रौपदी को निर्वस्त्र किया गया था. ये घटना बहुत अधिक जघन्य है.
जज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा,
“और सौभाग्य से, भाई, द्रौपदी की मदद करने के लिए भगवान श्री कृष्ण थे. इस आधुनिक युग में, गरीब द्रौपदी की मदद कौन करेगा? कोई भी कृष्ण मदद के लिए नहीं आएगा! जब द्रौपदी मदद के लिए रोती थी, तो भगवान श्री कृष्ण ने उसकी मदद की. दुर्भाग्य से, ये दुर्योधन और दुशासन की दुनिया है! एक भी भगवान कृष्ण मदद के लिए नहीं आएंगे.”
सुनवाई पूरी करने से पहले कोर्ट ने दोहराया कि ये एक शर्मनाक घटना है जो आजादी के 75 साल बाद 21वीं सदी के भारत में नहीं होनी चाहिए.
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