
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
हर साल दिवाली के आसपास और उसके बाद दिल्ली-NCR में पॉल्यूशन का लेवल बढ़ जाता है. हवा की खराब क्वॉलिटी बिगड़ती जाती है. दम घोंटू हवा में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है. लेकिन, अगर आप सोचते हैं कि दिल्ली-NCR देश के सबसे प्रदूषित शहर हैं तो आप गलत हैं. क्योंकि, देश के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से पहले एक ऐसा शहर है, जिसके नाम ही बहुत कम लोग जानते होंगे.
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने सैटेलाइट डेटा की मदद से देश के 4,041 शहरों में PM2.5 प्रदूषण को लेकर रिसर्च की है. इस रिसर्च के मुताबिक, देश के करीब 44% शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं. इन शहरों में से सिर्फ 4% हिस्सा ही नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के दायरे में शामिल हैं.असम-मेघालय बॉर्डर के पास स्थित बर्नीहाट शहर देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है.
2019 से 2025 के बीच के पॉल्यूशन डेटा का हुआ एनालिसिस
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिसर्च रिपोर्ट में 2019 से 2025 के बीच के प्रदूषण के डेटा का एनालिसिस किया गया. इसमें सामने आया कि लिस्ट में शामिल 10 शहरों में हर साल कम से कम 1,787 शहरों में PM2.5 का स्तर तय सीमा से ज्यादा रहा. इस रिसर्च में हालांकि, कोविड से प्रभावित साल 2020 का डेटा शामिल नहीं किया गया.
भारत के 10 सबसे प्रदूषित शहर
बर्नीहाट में PM2.5 का औसत 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय का बर्नीहाट सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर रहा. यहां PM2.5 का औसत 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था. इसके बाद दिल्ली (96) और गाजियाबाद (93) दूसरे और तीसरे नंबर पर है. लिस्ट में नोएडा चौथे स्थान पर है. इसके बाद गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, हाजीपुर, मुजफ्फरनगर और हापुड़ का नंबर आता है.
बर्नीहाट इतना ज्यादा प्रदूषित क्यों?
बर्नीहाट में इतने ज्यादा प्रदूषण की वजह स्थानीय कारखानों से निकलने वाला कार्बन उत्सर्जन है. इसमें शराब निर्माण, लोहा और स्टील प्लांट शामिल हैं. इन कारखानों से निकलने वाले उत्सर्जन की वजह से ही बर्नीहाट में प्रदूषण का स्तर हाई रहता है.
NCAP में सिर्फ 130 शहर
सरकार ने प्रदूषित कम करने के लिए 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) शुरू किया था. 7 साल बाद भी NCAP में सिर्फ 130 शहर शामिल हैं. इनमें से 67 शहर ही उन 1,787 शहरों में आते हैं, जहां हर साल मानक से ज्यादा प्रदूषण रहता है. NCAP में शामिल 28 शहरों में अब तक लगातार हवा की क्वालिटी मापने वाले स्टेशन (CAAQMS) नहीं लगाए गए हैं. जिन 102 शहरों में ये स्टेशन हैं, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80% या उससे ज्यादा दर्ज किया गया.
23 शहरों में PM10 का बढ़ गया लेवल
NCAP की शुरुआत के बाद 23 शहरों में PM10 का लेवल बढ़ गया है. दिल्ली में PM10 सबसे ज्यादा 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ. गाजियाबाद में ये 190 और ग्रेटर नोएडा में 188 दर्ज हुआ है. टॉप 50 PM10 शहरों में राजस्थान के 18, उत्तर प्रदेश के 10, मध्य प्रदेश के 5 और बिहार व ओडिशा के 4-4 शहर शामिल हैं.
PM2.5 पर फोकस बढ़ाना जरूरी
इस रिपोर्ट पर CREA के इंडिया एनालिस्ट मनोज कुमार ने कहा कि देश में हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए वैज्ञानिक आधार पर ठोस सुधार जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि PM10 की तुलना में PM2.5 और उससे जुड़ी गैसों, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, पर ज्यादा ध्यान देना होगा.
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