अहमदाबाद/नई दिल्ली. वरिष्ठ नेता अहमद पटेल की राज्यसभा की चुनावी लड़ाई को कांग्रेस ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. कांग्रेस के चीफ व्हिप के बीजेपी में चले जाने के बाद नए चीफ व्हिप शैलेष पवार ने मोर्चा संभाल लिया है. पवार ने गुजरात विधानसभा में अपने 51 विधायकों के लिए व्हिप जारी कर दिया है. विधायकों को कड़ाई से कहा गया है कि वे न तो NOTA (नन ऑफ द अबव) का बटन दबाएं और न ही बीजेपी के उम्मीदवार के लिए क्रॉस वोटिंग करें.Also Read - भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा, BJP को है यह उम्मीद

शैलेष परमार ने बताया कि कांग्रेस विधायक केवल पार्टी कैंडिडेट अहमद पटेल के लिए वोट करेंगे. बीजेपी झूठा प्रचार फैला रही है. उन्होंने कहा कि विधायकों को सिर्फ ये बताया गया है कि राज्य सभा चुनाव में क्या करना है, सिर्फ इसके बारे में विधायकों को सचेत किया गया है. विधायकों को यह बताने की कोई जरूरत नहीं है कि क्या नहीं करना चाहिए. हमने तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया है. Also Read - Parliament Winter Session: विपक्षी नेताओं ने की मुलाकात, वेंकैया नायडू की दो टूक-सांसदों को माफी मांगनी ही होगी

अहमद पटेल ने भी उठाए NOTA पर सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने गुजरात राज्यसभा चुनाव में नोटा का विकल्प लागू करने के चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा ‘अधिसूचना जारी किये जाने के बाद’ किया गया. पटेल राज्य से राज्यसभा चुनाव के लिये उम्मीदवारों में से एक हैं. उन्होंने जून में निर्धारित चुनाव में विलंब करने का भी उल्लेख किया. Also Read - कब बहाल होगा जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा? भाजपा बोली- पहले चुन कर की जा रही हत्याएं बंद हों

पटेल ने ट्विटर पर कहा, ‘पहले राज्यसभा का चुनाव स्थगित किया गया. फिर अधिसूचना के बाद नोटा की अनुमति दी गई. इसका कारण चुनाव आयोग को सही से पता होगा.’ चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं किये जाने की शर्त पर कहा कि राज्यसभा चुनावों में नोटा के इस्तेमाल के निर्देशों को जनवरी 2014 में ही लागू किया गया था जब सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ईवीएम में ‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प रखना अनिवार्य बना दिया. पटेल आठ अगस्त को होने वाले चुनाव में एक और कार्यकाल के लिये राज्यसभा पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं. पटेल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं.

रिसॉर्ट में ठहरे विधायक
उनकी पार्टी के गुजरात के विधायकों को बेंगलुरु में एक रिसॉर्ट में ठहराया गया है. ऐसा छह विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद किया गया. राज्य में तकरीबन दो दशक बाद राज्यसभा के लिये चुनाव हो रहे हैं क्योंकि आम तौर पर बिना मतदान के ही उम्मीदवारों को निर्वाचित कर लिया जाता था. चुनाव अधिकारियों ने घोषणा की कि इनमें से कोई नहीं (NOTA) का विकल्प राज्यसभा चुनावों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

गुजरात विधानसभा के सचिव डी एम पटेल ने कहा था कि राज्यसभा चुनाव में सभी मतपत्रों पर नोटा का विकल्प प्रकाशित किया जाएगा. चुनाव आयोग ने इससे पहले गुजरात, गोवा और पश्चिम बंगाल की 10 सीटों के लिये राज्यसभा चुनाव आठ जून को कराए जाने की घोषणा की थी. हालांकि, 22 मई को चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित करने की घोषणा की और चुनाव की नयी तारीख आठ अगस्त को निर्धारित की.

पहली बार NOTA का इस्तेमाल
गुजरात की सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में पहली बार नोटा के विकल्प का इस्तेमाल होने जा रहा है. बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रस की तरफ से एकमात्र उम्मीदवार अहमद पटेल हैं. कांग्रेस ने नोटा के इस्तेमाल पर एतराज जताया है. कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता. कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है.