नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आप सरकार और ‘राजीव गांधी कैंसर संस्थान’ से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा. इसमें आरोप लगाया गया है कि पिछले दो दशकों से अस्पताल गरीब मरीजों का मुफ्त में इलाज नहीं कर रहा है.

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की एक खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, अस्पताल और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को एक नोटिस जारी कर एनजीओ की ओर से दायर याचिका पर 28 जनवरी 2019 तक जवाब देने को कहा है.

सामाजिक न्यायवादी गैर सरकारी संगठन की ओर से वकील अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि अस्पताल को डीडीए ने रियायती मूल्यों पर भूमि इस शर्त पर दी थी कि वह आईपीडी में 10 प्रतिशत और ओपीडी में 25 प्रतिशत गरीब मरीजों का मुफ्त में इलाज करेगा. अग्रवाल ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय ने वर्ष 2007 में और उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2018 में भी याचिका में कही बात कही थी.

एनजीओ ने अदालत से अपील की है कि वह इस संबंध में अस्पताल को आदेश जारी करे. साथ ही उसने अदालत से दिल्ली सरकार से उसे (अस्पताल को) हुए ‘‘अनुचित लाभ’’ (जो उसने गरीब मरीजों का मुफ्त में इलाज ना कर कमाया है) की वसूली करने के आदेश देने की अपील भी की. इसके अलावा, याचिका में दिल्ली सरकार और डीडीए से भी अस्पताल के खिलाफ कदम उठाने की अपील की गई है.